Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

Yajurveda Adhyay 12 / Mantra 21

117 Mantra
12/21
Devata- अग्निर्देवता Rishi- वत्सप्रीर्ऋषिः Chhand- निचृदार्षी त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
अक्र॑न्दद॒ग्नि स्त॒नय॑न्निव॒ द्यौः क्षामा॒ रेरि॑हद् वी॒रुधः॑ सम॒ञ्जन्। स॒द्यो ज॑ज्ञा॒नो वि हीमि॒द्धोऽअख्य॒दा रोद॑सी भा॒नुना॑ भात्य॒न्तः॥२१॥

अक्र॑न्दत्। अ॒ग्निः। स्त॒नय॑न्नि॒वेति॑ स्त॒नय॑न्ऽइव। द्यौः। क्षामा॑। रेरि॑हत्। वी॒रुधः॑। स॒म॒ञ्जन्निति॑ सम्ऽअ॒ञ्जन्। स॒द्यः। ज॒ज्ञा॒नः। वि। हि। ई॒म्। इ॒द्धः। अख्य॑त्। आ। रोद॑सी॒ इति॒ रोद॑सी। भा॒नुना॑। भा॒ति॒। अ॒न्तरित्य॒न्तः ॥२१ ॥

Mantra without Swara
अक्रन्ददग्नि स्तनयन्निव द्यौः क्षामा रेरिहद्वीरुधः समञ्जन् । सद्यो जज्ञानो वि हीमिद्धोऽअख्यदा रोदसी भानुना भात्यन्तः ॥

अक्रन्दत्। अग्निः। स्तनयन्निवेति स्तनयन्ऽइव। द्यौः। क्षामा। रेरिहत्। वीरुधः। समञ्जन्निति सम्ऽअञ्जन्। सद्यः। जज्ञानः। वि। हि। ईम्। इद्धः। अख्यत्। आ। रोदसी इति रोदसी। भानुना। भाति। अन्तरित्यन्तः॥२१॥

Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

हिन्दी
Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma) - हिन्दी
Meaning
( अग्नि: ) अग्नि विद्युत् जिस प्रकार ( अक्रन्दत ) गर्जना करता है । और ( द्यौ: ) जल दान करनेवाला मेघ जिस प्रकार ( स्तनयन् इव ) गर्जना करता है उसी प्रकार ( अग्निः ) ज्ञानी, विद्वान् गम्भीर स्वर से उपदेश करे और मेघ के समान समानभाव से सबको ज्ञान प्रदान करे. इसी प्रकार तेजस्वी राजा सिंह गर्जना करे और मेघ के समान गम्भीर ध्वनि करे । मेघ ( क्षामा ) क्षामा अर्थात् पृथ्वी को जिस प्रकार जलधारा रूप से प्राप्त होकर ( विरुधः सम् अञ्जन् ) नाना प्रकार से उत्पन्न होने वाली लताओं को प्रकट करता है उसी प्रकार वह तेजस्वी राजा भी ( क्षामा ) पृथिवी को ( रेरिहत् ) स्वयं भोग करता हुआ ( वीरुधः ) नाना प्रकार से उन्नतिशील प्रजाओं को ( सम् अञ्जन् ) ज्ञानादि से प्रकाशित करता है । वह ( सद्यः ) शीघ्र ही ( जज्ञानः ) प्रकट होकर अपने गुणों से ( इद्धः ) तेजस्वी एवं प्रकाशित होकर ( हि ) निश्चय से ( ईम् ) इस लोक को ( वि अख्यत् ) विशेष प्रकार से प्रकाशित करता है । और ( रोदसी ) आकाश और पृथिवी के ( अन्तः ) बीच में सूर्य के समान राजा प्रजा के बीच और विद्वान् पुत्र माता पिता के बीच ( भानुना ) अपनी कान्ति से (आ भाति ) प्रकाशित होता है ॥ शत० ६ । ७ ।३।।
Subject
ओनल और विद्युत् के समान राजे पद का वर्णन ।