Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

Yajurveda Adhyay 11 / Mantra 2

83 Mantra
11/2
Devata- सविता देवता Rishi- प्रजापतिर्ऋषिः Chhand- शङ्कुमती गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
यु॒क्तेन॒ मन॑सा व॒यं दे॒वस्य॑ सवि॒तुः स॒वे। स्व॒र्ग्याय॒ शक्त्या॑॥२॥

यु॒क्तेन॑। मन॑सा। व॒यम्। दे॒वस्य॑। स॒वि॒तुः। स॒वे। स्व॒र्ग्या᳖येति॑ स्वः॒ऽग्या᳖य॒। शक्त्या॑ ॥२ ॥

Mantra without Swara
युक्तेन मनसा वयन्देवस्य सवितुः सवे । स्वर्ग्याय शक्त्या ॥

युक्तेन। मनसा। वयम्। देवस्य। सवितुः। सवे। स्वर्ग्यायेति स्वःऽग्याय। शक्त्या॥२॥

Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

हिन्दी
Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma) - हिन्दी
Meaning
( वयम् ) हम सब लोग ( युत्केन मनसा ) योग द्वारा समाहित, एकाग्र स्थिर ( मनसा ) चित्त से ( सवितुः ) सर्वोत्पादक ( देवस्य ) परम देव, परमेश्वर के ( सवे ) उत्पादित जगत् में ( शक्त्या ) अपनी शक्ति से ( स्वर्ग्याय ) परम सुख लाभ के लिये ( ज्योतिः आभरेम ) उस परम ज्ञान को प्राप्त करे । राजा के पक्ष में- एकाग्र, शुद्ध चित्त से हम प्रेरक राजा के राज्य में अपनी शक्ति से सुखमय राष्ट्र की उन्नति के लिये यत्न करें । शत० ६ । ३ । १ । १४ ॥
Subject
योग द्वारा ज्ञान प्रप्ति । पक्षान्तर में राजा का कर्तव्य।
Rishi | Devata | Chhanda | Swara
सविता ऋषिः । सविता देवता । शङकुमती गायत्री । षड्जः ॥