Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

Yajurveda Adhyay 1 / Mantra 23

31 Mantra
1/23
Devata- अग्निर्देवता Rishi- परमेष्ठी प्रजापतिर्ऋषिः Chhand- बृहती, Swara- मध्यमः
Mantra with Swara
मा भे॒र्मा॒ संवि॑क्था॒ऽअत॑मेरुर्य॒ज्ञोऽत॑मेरु॒र्यज॑मानस्य प्र॒जा भू॑यात् त्रि॒ताय॑ त्वा द्वि॒ताय॑ त्वैक॒ताय॑ त्वा॥२३॥

मा। भेः॒। मा। सम्। वि॒क्थाः॒। अत॑मेरुः। य॒ज्ञः। अत॑मेरुः। यज॑मानस्य। प्र॒जेति॑ प्र॒ऽजा। भू॒या॒त्। त्रि॒ताय॑। त्वा॒। द्वि॒ताय॑। त्वा॒। ए॒क॒ताय॑। त्वा॒ ॥२३॥

Mantra without Swara
मा भेर्मा सँविक्थाऽतमेरुर्यज्ञो तमेरुर्यजमानस्य प्रजा भूयात्त्रिताय त्वा द्विताय त्वैकताय त्वा ॥

मा। भेः। मा। सम्। विक्थाः। अतमेरुः। यज्ञः। अतमेरुः। यजमानस्य। प्रजेति प्रऽजा। भूयात्। त्रिताय। त्वा। द्विताय। त्वा। एकताय। त्वा॥२३॥

Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

हिन्दी
Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma) - हिन्दी
Meaning
हे पुरुष ! ( मा भे: ) तू मत डर । ( मा संविक्थाः ) तू उद्विग्न मत हो । ( यज्ञः ) गृहस्थ रूप यज्ञ ( अतमेरुः ) सदा ग्लानिरहित, अनथक, सदा बलवान् रहे। और ( यजमानस्य ) यज्ञशील पुरुष की (प्रजा) प्रजा, सन्तान भी ( अतमेरुः ) कभी ग्लानियुक्त, मलिन, निर्बल न ( भूयात्) हो । हे गृहपते ! (त्वा ) तुझ को मैं ( त्रिताय ) तीन वेदों में पारंगत और ( द्विताय ) दो वेद में पारंगत और ( एकताय ) एक वेद में पारंगत पुरुष के लिये ( संयौमि ) नियुक्त करता हूं अथवा त्रित=माता, पिता और गुरु के निमित्त, द्वित=माता, पिता और एकत= केवल परमात्मा की सेवा में नियुक्त करता हूँ । राजा को भी ऐसा ही उपदेश है । तू भय मत कर, उद्विग्न मत हो । राष्ट्रमय यज्ञ ग्लानिरहित हो। राजा, प्रजा 'ग्लानिरहित' सदा प्रसन्न रहें । त्रित अर्थात् शत्रु, मित्र और उदासीन तीनों के लिये, द्वित अर्थात् सन्धि, विग्रह और एक अर्थात् एक चक्रवर्ती राज्य के लिये तुझे नियुक्त करता हूं । अथवा प्रजा में विद्यमान त्रित अर्थात् उत्तम, मध्यम, अधम या तीन वर्ण के लिये द्वित अर्थात् स्त्री पुरुष, पति पत्नी, एकत अर्थात् एकान्त सेवी मोक्षार्थी लोगों के हित के लिये नियुक्त 
करता हूं ।। शत० १।२।७।१-३१ ॥ 
Subject
राजा और पुरुष को कार्यभार उठाने के लिये निर्भय होने का उपदेश ।
Rishi | Devata | Chhanda | Swara
 पुरोडाशः त्रितद्वितैकताः अग्निर्वा देवता । बृहती । मध्यमः ॥