Yajurveda Marathi Bhashya (Mata Savita Joshi)

Yajurveda Adhyay 9 / Mantra 21

40 Mantra
9/21
Devata- यज्ञो देवता Rishi- वसिष्ठ ऋषिः Chhand- अत्यष्टिः Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
आयु॑र्य॒ज्ञेन॑ कल्पतां प्रा॒णो य॒ज्ञेन॑ कल्पतां॒ चक्षु॑र्य॒ज्ञेन॑ कल्पता॒ श्रोत्रं॑ य॒ज्ञेन॑ कल्पतां पृ॒ष्ठं य॒ज्ञेन॑ कल्पतां य॒ज्ञो य॒ज्ञेन॑ कल्पताम्। प्र॒जाप॑तेः प्र॒जाऽअ॑भूम॒ स्वर्देवाऽअगन्मा॒मृता॑ऽअभूम॥२१॥

आयुः॑। य॒ज्ञेन॑। क॒ल्प॒ता॒म्। प्रा॒णः। य॒ज्ञेन॑। क॒ल्प॒ता॒म्। चक्षुः॑। य॒ज्ञेन॑। क॒ल्प॒ता॒म्। श्रोत्र॑म्। य॒ज्ञेन॑। क॒ल्प॒ता॒म्। पृ॒ष्ठम्। य॒ज्ञेन॑। क॒ल्प॒ता॒म्। य॒ज्ञः। य॒ज्ञेन॑। क॒ल्प॒ता॒म्। प्र॒जाप॑ते॒रिति॑ प्र॒जाऽप॑तेः। प्र॒जा इति॑ प्र॒ऽजाः। अ॒भू॒म॒। स्वः॑। दे॒वाः॒। अ॒ग॒न्म॒। अ॒मृताः॑। अ॒भू॒म॒ ॥२१॥

Mantra without Swara
आयुर्यज्ञेन कल्पताम्प्राणो यज्ञेन कल्पताञ्चक्षुर्यज्ञेन कल्पताँ श्रोत्रँ यज्ञेन कल्पताम्पृष्ठँ यज्ञेन कल्पताँयज्ञो यज्ञेन कल्पताम् । प्रजापतेः प्रजाऽअभूम स्वर्देवा ऽअगन्मामृता ऽअभूम ॥

आयुः। यज्ञेन। कल्पताम्। प्राणः। यज्ञेन। कल्पताम्। चक्षुः। यज्ञेन। कल्पताम्। श्रोत्रम्। यज्ञेन। कल्पताम्। पृष्ठम्। यज्ञेन। कल्पताम्। यज्ञः। यज्ञेन। कल्पताम्। प्रजापतेरिति प्रजाऽपतेः। प्रजा इति प्रऽजाः। अभूम। स्वः। देवाः। अगन्म। अमृताः। अभूम॥२१॥

Yajurveda Marathi Bhashya (Mata Savita Joshi)

मराठी
Yajurveda Marathi Bhashya (Mata Savita Joshi) - मराठी
Essence
मी ईश्वर सर्व माणसांना अशी आज्ञा देतो की तुम्ही माझ्याप्रमाणे धर्मयुक्त गुण, कर्म, स्वभावाच्या पुरुषाची प्रजा बना, अन्य कुणा क्षुद्र पुरुषाची प्रजा बनण्यास तयार होऊ नका. मला न्यायाधीश मानून माझ्या आज्ञेत राहा. धर्म हे सर्वस्व मानून नेहमी इहलोक व परलोकाचे सुख प्राप्त करा. जो पुरुष धर्मयुक्त न्यायाने तुमचे निरन्तर पालन करील त्याला राजा माना.