Yajurveda Marathi Bhashya (Mata Savita Joshi)

Yajurveda Adhyay 6 / Mantra 5

37 Mantra
6/5
Devata- विष्णुर्देवता Rishi- मेधातिथिर्ऋषिः Chhand- आर्षी गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
तद्विष्णोः॑ पर॒मं प॒दꣳ सदा॑ पश्यन्ति सूरयः॑। दि॒वीव॒ चक्षु॒रात॑तम्॥५॥

तत्। विष्णोः॑। प॒र॒मम्। प॒दम्। सदा॑। प॒श्य॒न्ति॒। सू॒रयः॑। दि॒वी᳕वेति॑ दिविऽइ॑व। चक्षुः॑। आत॑त॒मित्यात॑तम् ॥५॥

Mantra without Swara
तद्विष्णोः परमं पदँ सदा पश्यन्ति सूरयो दिवीव चक्षुराततम् ॥

तत्। विष्णोः। परमम्। पदम्। सदा। पश्यन्ति। सूरयः। दिवीवेति दिविऽइव। चक्षुः। आततमित्याततम्॥५॥

Yajurveda Marathi Bhashya (Mata Savita Joshi)

मराठी
Yajurveda Marathi Bhashya (Mata Savita Joshi) - मराठी
Essence
या मंत्रात पूर्वीच्या मंत्रातील (पश्यत) या पदाची अनुवृत्ती झालेली आहे व पूर्णोपमालंकार आहे. पापरहित विद्वान लोक आपल्या ज्ञानयुक्त प्रकाशाने जसे ईश्वराचे गुण जाणून सत्यधर्माचे आचरण करतात तसे सर्व लोकांनी करावे.