Yajurveda Marathi Bhashya (Mata Savita Joshi)

Yajurveda Adhyay 35 / Mantra 18

22 Mantra
35/18
Devata- अग्निर्देवता Rishi- दमन ऋषिः Chhand- विराडनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
परी॒मे गाम॑नेषत॒ पर्य॒ग्निम॑हृषत।दे॒वेष्व॑क्रत॒ श्रवः॒ कऽ इ॒माँ२ऽ आ द॑धर्षति॥१८॥

परि॑। इ॒मे। गाम्। अ॒ने॒ष॒त॒। परि॑। अ॒ग्निम्। अ॒हृ॒ष॒त॒ ॥ दे॒वेषु॑। अ॒क्र॒त॒। श्रवः॑। कः। इ॒मान्। आ। द॒ध॒र्ष॒ति॒ ॥१८ ॥

Mantra without Swara
परीमे गामनेषत पर्यग्निमहृषत । देवेष्वक्रत श्रवः क इमाँऽआ दधर्षति ॥

परि। इमे। गाम्। अनेषत। परि। अग्निम्। अहृषत॥ देवेषु। अक्रत। श्रवः। कः। इमान्। आ। दधर्षति॥१८॥

Yajurveda Marathi Bhashya (Mata Savita Joshi)

मराठी
Yajurveda Marathi Bhashya (Mata Savita Joshi) - मराठी
Essence
या मंत्रात वाचकलुप्तोपमालंकार आहे. जे राजपुरुष पृथ्वीप्रमाणे धैर्यवान, अग्नीप्रमाणे तेजस्वी, अन्नाप्रमाणे आयुवर्धक व धर्मयुक्त बनून प्रजेचे रक्षण करतात त्यांना अतुल राज्यलक्ष्मी प्राप्त होते.