Yajurveda Marathi Bhashya (Mata Savita Joshi)

Yajurveda Adhyay 33 / Mantra 35

97 Mantra
33/35
Devata- सूर्यो देवता Rishi- श्रुतकक्षसुकक्षावृषी Chhand- पिपीलिकामध्या निचृदगायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
यद॒द्य कच्च॑ वृत्रहन्नु॒दगा॑ऽअ॒भि सू॑र्य्य।सर्वं॒ तदि॑न्द्र ते॒ वशे॑॥३५॥

यत्। अ॒द्य। कत्। च॒। वृ॒त्र॒ह॒न्निति॑ वृत्रऽहन्। उ॒दगा॒ इत्यु॒त्ऽअगाः॑। अ॒भि। सू॒र्य्य॒ ॥ सर्व॑म्। तत्। इ॒न्द्र॒। ते॒ वशे॑ ॥३५ ॥

Mantra without Swara
यदद्य कच्च वृत्रहन्नुदगा अभि सूर्य । सर्वं तदिन्द्र ते वशे ॥

यत्। अद्य। कत्। च। वृत्रहन्निति वृत्रऽहन्। उदगा इत्युत्ऽअगाः। अभि। सूर्य्य॥ सर्वम्। तत्। इन्द्र। ते वशे॥३५॥

Yajurveda Marathi Bhashya (Mata Savita Joshi)

मराठी
Yajurveda Marathi Bhashya (Mata Savita Joshi) - मराठी
Essence
या मंत्रात वाचकलुप्तोपमालंकार आहे. जे पुरुष सूर्याप्रमाणे (अविद्यारूपी) अंधःकार व दुष्टता यांचे निवारण करून सर्वांना वश करतात त्यांचा अभ्युदय होतो.