Yajurveda Marathi Bhashya (Mata Savita Joshi)

Yajurveda Adhyay 33 / Mantra 34

97 Mantra
33/34
Devata- सविता देवता Rishi- अगस्त्य ऋषिः Chhand- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
आ न॒ऽइडा॑भिर्वि॒दथे॑ सुश॒स्ति वि॒श्वान॑रः सवि॒ता दे॒वऽए॑तु।अपि॒ यथा॑ युवानो॒ मत्स॑था नो॒ विश्वं॒ जग॑दभिपि॒त्वे म॑नी॒षा॥३४॥

आ। नः॒। इडा॑भिः। वि॒दथे॑। सु॒श॒स्तीति॑ सुऽश॒स्ति। वि॒श्वान॑रः। स॒वि॒ता। दे॒वः। ए॒तु॒ ॥ अपि॑। यथा॑। यु॒वा॒नः॒। मत्स॑थ। नः॒। विश्व॑म्। जग॑त्। अ॒भि॒पि॒त्व इत्य॑भिऽपि॒त्वे। म॒नी॒षा ॥३४ ॥

Mantra without Swara
आ नऽइडाभिर्विदथे सुशस्ति विश्वानरः सविता देवऽएतु । अपि यथा युवानो मत्सथा नो विश्वञ्जगदभिपित्वे मनीषा ॥

आ। नः। इडाभिः। विदथे। सुशस्तीति सुऽशस्ति। विश्वानरः। सविता। देवः। एतु॥ अपि। यथा। युवानः। मत्सथ। नः। विश्वम्। जगत्। अभिपित्व इत्यभिऽपित्वे। मनीषा॥३४॥

Yajurveda Marathi Bhashya (Mata Savita Joshi)

मराठी
Yajurveda Marathi Bhashya (Mata Savita Joshi) - मराठी
Essence
या मंत्रात उपमा व वाचकलुप्तोपमालंकार आहे. जे सूर्याप्रमाणे विद्येने प्रकाशयुक्त असतात, ज्यांचे शरीर व आत्मे तरुण असतात, जे सुशक्षित सुशील जितेंद्रिय असतात ते सर्वांना उपदेश करून ज्ञान देऊ शकतात.