Yajurveda Marathi Bhashya (Mata Savita Joshi)

Yajurveda Adhyay 2 / Mantra 8

34 Mantra
2/8
Devata- विष्णुर्देवता Rishi- परमेष्ठी प्रजापतिर्ऋषिः Chhand- विराट् ब्राह्मी पङ्क्ति, Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
अस्क॑न्नम॒द्य दे॒वेभ्य॒ऽआज्य॒ꣳ संभ्रि॑यास॒मङ्घ्रि॑णा विष्णो॒ मा त्वाव॑क्रमिषं॒ वसु॑मतीमग्ने ते छा॒यामुप॑स्थेषं॒ विष्णो॒ स्थान॑मसी॒तऽइन्द्रो॑ वी॒र्य्यमकृणोदू॒र्ध्वोऽध्व॒रऽआस्था॑त्॥८॥

अस्क॑न्नम्। अ॒द्य। दे॒वेभ्यः॑। आज्य॑म्। सम्। भ्रि॒या॒स॒म्। अङ्घ्रि॑णा। वि॒ष्णो॒ऽइति॑ विष्णो। मा। त्वा॒। अव॑। क्र॒मि॒ष॒म्। वसु॑मती॒मिति॒ वसु॑ऽमतीम्। अ॒ग्ने॒। ते॒। छा॒याम्। उप॑। स्थे॒ष॒म्। विष्णोः॑। स्थान॑म्। अ॒सि॒। इ॒तः। इन्द्रः॑। वी॒र्य्य᳖म्। अ॒कृ॒णो॒त्। ऊ॒र्ध्वः। अ॒ध्व॒रः। आ। अ॒स्था॒त् ॥८॥

Mantra without Swara
अस्कन्नमद्य देवेभ्यऽआज्यँ सम्भ्रियासमङ्घ्रिणा विष्णो मा त्वावक्रमिषँवसुमतीमग्ने ते छायामुपस्थेषँ विष्णो स्थानमसीतऽइन्द्रो वीर्यमकृणोदूर्ध्वा ध्वर आस्थात् ॥

अस्कन्नम्। अद्य। देवेभ्यः। आज्यम्। सम्। भ्रियासम्। अङ्घ्रिणा। विष्णोऽइति विष्णो। मा। त्वा। अव। क्रमिषम्। वसुमतीमिति वसुऽमतीम्। अग्ने। ते। छायाम्। उप। स्थेषम्। विष्णोः। स्थानम्। असि। इतः। इन्द्रः। वीर्य्यम्। अकृणोत्। ऊर्ध्वः। अध्वरः। आ। अस्थात्॥८॥

Yajurveda Marathi Bhashya (Mata Savita Joshi)

मराठी
Yajurveda Marathi Bhashya (Mata Savita Joshi) - मराठी
Essence
ईश्वर उपदेश करतो की, ज्या पूर्वोक्त यज्ञामुळे जल व वायू शुद्ध होऊन पुष्कळ अन्न उत्पन्न होते, त्यासाठी माणसांनी पुष्कळ यज्ञसामग्री एकत्रित करावी. मी (परमेश्वर) सर्वव्यापक असून, माझ्या आज्ञेचे उल्लंघन करू नये. असंख्य सुख ज्या आश्रयामुळे प्राप्त होते तो (माझा) आश्रय सदैव घेतला पाहिजे. अग्नीत जी आहुती दिली जाते त्यांना सूर्य आपल्या किरणांद्वारे ओढून घेतो व वायूच्या साह्याने त्यांची मेघमंडळात स्थापना करतो आणि त्यांना पुन्हा मेघांद्वारेच खाली पाडतो. त्यामुळे पृथ्वीवर अनुकूल परिस्थिती निर्माण होते. अशा यज्ञाचे अनुष्ठान सर्व माणसांनी सदैव केले पाहिजे.