Yajurveda Marathi Bhashya (Mata Savita Joshi)

Yajurveda Adhyay 18 / Mantra 26

77 Mantra
18/26
Devata- पशुविद्याविदात्मा देवता Rishi- देवा ऋषयः Chhand- ब्राह्मी बृहती Swara- मध्यमः
Mantra with Swara
त्र्यवि॑श्च मे त्र्य॒वी च॑ मे दित्य॒वाट् च॑ मे दित्यौ॒ही च॑ मे॒ पञ्चा॑विश्च मे पञ्चा॒वी च॑ मे त्रिव॒त्सश्च॑ मे त्रिव॒त्सा च॑ मे तुर्य॒वाट् च॑ मे तुर्यौ॒ही च॑ मे य॒ज्ञेन॑ कल्पन्ताम्॥२६॥

त्र्यवि॒रिति॑ त्रि॒ऽअविः॑। च॒। मे॒। त्र्य॒वीति॑ त्रिऽअ॒वी। च॒। मे॒। दि॒त्य॒वाडिति॑ दित्य॒ऽवाट्। च॒। मे॒। दि॒त्यौ॒ही। च॒। मे॒। पञ्चा॑वि॒रिति॒ पञ्च॑ऽअविः। च॒। मे॒। प॒ञ्चा॒विति॑ पञ्चऽअ॒वी। च॒। मे॒। त्रि॒व॒त्स इति॑ त्रिऽव॒त्सः। च॒। मे॒। त्रि॒व॒त्सेति॑ त्रिऽव॒त्सा। च॒। मे॒। तु॒र्य॒वाडिति॑ तुर्य॒ऽवाट्। च॒। मे॒। तु॒र्यौ॒ही। च॒। मे॒। य॒ज्ञेन॑। क॒ल्प॒न्ताम् ॥२६ ॥

Mantra without Swara
त्र्यविश्च मे त्र्यवी च मे दित्यवाट्च मे दित्यौही च मे पञ्चाविश्च मे पञ्चावी च मे त्रिवत्सश्च मे त्रिवत्सा च मे तुर्यवाट्च मे तुर्याही च मे यज्ञेन कल्पन्ताम् ॥

त्र्यविरिति त्रिऽअविः। च। मे। त्र्यवीति त्रिऽअवी। च। मे। दित्यवाडिति दित्यऽवाट्। च। मे। दित्यौही। च। मे। पञ्चाविरिति पञ्चऽअविः। च। मे। पञ्चाविति पञ्चऽअवी। च। मे। त्रिवत्स इति त्रिऽवत्सः। च। मे। त्रिवत्सेति त्रिऽवत्सा। च। मे। तुर्यवाडिति तुर्यऽवाट्। च। मे। तुर्यौही। च। मे। यज्ञेन। कल्पन्ताम्॥२६॥

Yajurveda Marathi Bhashya (Mata Savita Joshi)

मराठी
Yajurveda Marathi Bhashya (Mata Savita Joshi) - मराठी
Essence
या मंत्रात गाई, बकरे, लांडगे यांच्या उपलक्षणाने इतर पशूंचेही आकलन होते. हे विधान पशूसंबंधी आहे हे समजले पाहिजे. जी माणसे पशूंचे पालन करतात. त्यांच्या दूध वगैरेने ती माणसे संपन्न होतात.