Yajurveda Marathi Bhashya (Mata Savita Joshi)

Yajurveda Adhyay 14 / Mantra 21

31 Mantra
14/21
Devata- विदुषी देवता Rishi- विश्वदेव ऋषिः Chhand- निचृदनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
मू॒र्द्धासि॒ राड् ध्रु॒वासि॑ ध॒रुणा॑ ध॒र्त्र्यसि॒ धर॑णी। आयु॑षे त्वा॒ वर्च॑से त्वा कृ॒ष्यै त्वा॒ क्षेमा॑य त्वा॥२१॥

मू॒र्द्धा। अ॒सि॒। राट्। ध्रु॒वा। अ॒सि॒। ध॒रुणा॑। ध॒र्त्री। अ॒सि॒। धर॑णी। आयु॑षे। त्वा॒। वर्च॑से। त्वा॒। कृ॒ष्यै। त्वा॒। क्षेमा॑य। त्वा॒ ॥२१ ॥

Mantra without Swara
मूर्धासि राड्धु्रवासि धरुणा धर्त्र्यसि धरणी । आयुषे त्वा वर्चसे त्वा कृष्यै त्वा क्षेमाय त्वा ॥

मूर्द्धा। असि। राट्। ध्रुवा। असि। धरुणा। धर्त्री। असि। धरणी। आयुषे। त्वा। वर्चसे। त्वा। कृष्यै। त्वा। क्षेमाय। त्वा॥२१॥

Yajurveda Marathi Bhashya (Mata Savita Joshi)

मराठी
Yajurveda Marathi Bhashya (Mata Savita Joshi) - मराठी
Essence
सर्वात उत्तम अवयव म्हणजे मेंदू. त्यामुळे सर्वांचे जीवन बनते. लक्ष्मीमुळे राज्य टिकते. शेतीमुळे अन्न इत्यादी पदार्थ मिळतात व घरामुळे सर्वांचे रक्षण होते. पृथ्वी ही सर्वांचा आधार असलेल्या मातेसमान असते त्यासाठी विदुषी स्त्रीने त्याप्रमाणे (मातेसमान) तसे वागावे.