Yajurveda Marathi Bhashya (Mata Savita Joshi)

Yajurveda Adhyay 1 / Mantra 20

31 Mantra
1/20
Devata- सविता देवता Rishi- परमेष्ठी प्रजापतिर्ऋषिः Chhand- विराट् ब्राह्मी त्रिष्टुप्, Swara- धैवतः
Mantra with Swara
धा॒न्यमसि धिनु॒हि दे॒वान् प्रा॒णाय॑ त्वोदा॒नाय॑ त्वा व्या॒नाय॑ त्वा। दी॒र्घामनु॒ प्रसि॑ति॒मायु॑षे धां दे॒वो वः॑ सवि॒ता हिर॑ण्यपाणिः॒ प्रति॑गृभ्णा॒त्वच्छि॑द्रेण पा॒णिना॒ चक्षु॑षे त्वा म॒हीनां॒ पयो॑ऽसि॥ २०॥

धा॒न्य᳖म्। अ॒सि॒। धि॒नु॒हि। दे॒वान्। प्रा॒णाय॑। त्वा॒। उ॒दा॒नायेत्यु॑त्ऽआ॒नाय॑। त्वा॒। व्या॒नायेति॑ विऽआ॒नाय॑। त्वा॒। दी॒र्घाम्। अनु॑। प्रसि॑तिमिति॒ प्रऽसि॑तिम्। आयु॑षे। धा॒म्। दे॒वः। वः॒। स॒वि॒ता। हिर॑ण्यपाणि॒रिति॒ हिर॑ण्यऽपाणिः। प्रति॑। गृ॒भ्णा॒तु॒। अच्छि॑द्रेण। पा॒णिना॒। चक्षु॑षे। त्वा॒। म॒हीना॑म्। पयः॑। अ॒सि॒ ॥२०॥

Mantra without Swara
धान्यमसि धिनुहि देवान् प्राणाय त्वोदानाय त्वा व्यानाय त्वा। दीर्घामनु प्रसितिमायुषे धां देवो वः सविता हिरण्यपाणिः प्रति गृभ्णात्वच्छिद्रेण पाणिना चक्षुषे त्वा महीनां पयोऽसि ॥

धान्यम्। असि। धिनुहि। देवान्। प्राणाय। त्वा। उदानायेत्युत्ऽआनाय। त्वा। व्यानायेति विऽआनाय। त्वा। दीर्घाम्। अनु। प्रसितिमिति प्रऽसितिम्। आयुषे। धाम्। देवः। वः। सविता। हिरण्यपाणिरिति हिरण्यऽपाणिः। प्रति। गृभ्णातु। अच्छिद्रेण। पाणिना। चक्षुषे। त्वा। महीनाम्। पयः। असि॥२०॥

Yajurveda Marathi Bhashya (Mata Savita Joshi)

मराठी
Yajurveda Marathi Bhashya (Mata Savita Joshi) - मराठी
Essence
या मंत्रात लुप्तोपमालंकार आहे. यज्ञामुळे अन्न, जल, वायू इत्यादी पदार्थ शुद्ध होतात. तसेच ते सर्वांना शुद्ध करणारे, बल देणारे, दीर्घायुषी व पराक्रमी बनविणारे असतात. त्यामुळे सर्व लोकांनी यज्ञाचे नित्य अनुष्ठान करावे. परमेश्वरकृत चारही वेदवाणीचा प्रत्यय येण्यासाठी पुरुषार्थ करावा व परमेश्वराचा अनुग्रह व्हावा, अशी इच्छा बाळगावी. ज्याप्रमाणे परोपकारी माणसावर ईश्वर कृपा करतो त्याप्रमाणे सर्व प्राण्यांवर आपणही कृपादृष्टी ठेवावी. ज्याप्रमाणे अन्तर्यामी ईश्वर आत्म्यात व वेदात सत्य ज्ञान देतो व सूर्य जगातील मूर्त पदार्थांना सतत प्रकाश देत असतो. तसेच परस्पर सुखासाठी आपणही सर्व विद्या सर्व माणसांसमोर प्रकट केली पाहिजे व चक्रवर्ती राज्य वगैरे अनेक सुखांची निर्मिती त्या विद्यांद्वारे केली पाहिजे.