Yajurveda Bhashyam (Swami Dayanand Saraswati)

Yajurveda Adhyay 17 / Mantra 8

99 Mantra
17/8
Devata- अग्निर्देवता Rishi- वसुयुर्ऋषिः Chhand- आर्षी गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अग्ने॑ पावक रो॒चिषा॑ म॒न्द्रया॑ देव जि॒ह्वया॑। आ दे॒वान् व॑क्षि॒ यक्षि॑ च॥८॥

अग्ने॑। पा॒व॒क॒। रो॒चिषा॑। म॒न्द्रया॑। दे॒व॒। जि॒ह्वया॑। आ। दे॒वान्। व॒क्षि॒। यक्षि॑। च॒ ॥८ ॥

Mantra without Swara
अग्ने पावक रोचिषा मन्द्रया देव जिह्वया । आ देवान्वक्षि यक्षि च ॥

अग्ने। पावक। रोचिषा। मन्द्रया। देव। जिह्वया। आ। देवान्। वक्षि। यक्षि। च॥८॥

Yajurveda Bhashyam (Swami Dayanand Saraswati)

संस्कृत
Yajurveda Bhashyam (Swami Dayanand Saraswati) - संस्कृत
Meaning
(अग्ने) विद्याप्रकाशकोपदेशक (पावक) जनान्तःकरणशोधक! (रोचिषा) प्रकाशेन (मन्द्रया) आनन्दसाधिकया (देव) कमनीय (जिह्वया) सत्यप्रियया वाचा (आ) (देवान्) विदुषो दिव्यगुणान् वा (वक्षि) उपदिशसि (यक्षि) संगच्छसे। अत्र बहुलं छन्दसि [अष्टा॰२.४.७३] इति शपो लुक् (च)॥८॥
Essence
यथा सूर्यः स्वप्रकाशेन सर्वं जगद् रोचयति, तथैवाप्तोपदेशकाः सर्वाञ्जनान् प्रीणीयुः॥८॥
Subject
आप्तैर्विद्वद्भिः किं कार्य्यमित्याह॥
Anvaya
हे पावक देवाग्ने! त्वं मन्द्रया जिह्वया रोचिषा देवानावक्षि यक्षि च॥८॥