Yajurveda Bhashyam (Swami Dayanand Saraswati)

Yajurveda Adhyay 12 / Mantra 9

117 Mantra
12/9
Devata- अग्निर्देवता Rishi- वत्सप्रीर्ऋषिः Chhand- निचृदार्षी Swara- षड्जः
Mantra with Swara
पुन॑रू॒र्जा निव॑र्त्तस्व॒ पुन॑रग्नऽइ॒षायु॑षा। पुन॑र्नः पा॒ह्यꣳह॑सः॥९॥

पुनः॑। ऊ॒र्जा। नि। व॒र्त्त॒स्व॒। पुनः॑। अ॒ग्ने॒। इ॒षा। आयु॑षा। पुनः॑। नः॒। पा॒हि॒। अꣳह॑सः ॥९ ॥

Mantra without Swara
पुनरूर्जा निवर्तस्व पुनरग्नऽइषायुषा पुनर्नः पाह्यँहसः ॥

पुनः। ऊर्जा। नि। वर्त्तस्व। पुनः। अग्ने। इषा। आयुषा। पुनः। नः। पाहि। अꣳहसः॥९॥

Yajurveda Bhashyam (Swami Dayanand Saraswati)

संस्कृत
Yajurveda Bhashyam (Swami Dayanand Saraswati) - संस्कृत
Meaning
(पुनः) (ऊर्जा) पराक्रमयुक्तानि कर्माणि (नि) (वर्त्तस्व) (पुनः) (अग्ने) विद्वन्! (इषा) इच्छया (आयुषा) अन्नेन (पुनः) (नः) अस्मान् (पाहि) रक्ष (अंहसः) पापात्। [अयं मन्त्रः शत॰६.७.३.६ व्याख्यातः]॥९॥
Essence
विद्वांसः सर्वानुपदेश्यान् मनुष्यान् पापात् सततं निवर्त्य शरीरात्मबलयुक्तान् सम्पादयन्तु, स्वयं च पापान्निवृत्ताः परमपुरुषार्थिनः स्युः॥९॥
Subject
पुनरध्यापककृत्यमाह॥
Anvaya
हे अग्ने! त्वं नोऽस्मानंहसः पुनर्निवर्त्तस्व, पुनरस्मान् पाहि, पुनरिषाऽऽयुषोर्जा प्रापय॥९॥