Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Yajurveda Adhyay 9 / Mantra 8

40 Mantra
9/8
Devata- प्रजापतिर्देवता Rishi- बृहस्पतिर्ऋषिः Chhand- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
वात॑रꣳहा भव वाजिन् यु॒ज्यमा॑न॒ऽइन्द्र॑स्येव॒ दक्षि॑णः श्रि॒यैधि॑। यु॒ञ्जन्तु॑ त्वा म॒रुतो॑ वि॒श्ववे॑दस॒ऽआ ते॒ त्वष्टा॑ प॒त्सु ज॒वं द॑धातु॥८॥

वात॑रꣳहा॒ इति वात॑ऽरꣳहाः। भ॒व॒। वाजि॑न्। युज्यमा॑नः। इन्द्र॑स्ये॒वेतीन्द्र॑स्यऽइव। दक्षि॑णः। श्रि॒या। ए॒धि॒। यु॒ञ्जन्तु॑। त्वा॒। म॒रुतः॑। वि॒श्ववे॑दस॒ इति॑ वि॒श्वऽवे॑दसः। आ। ते॒। त्वष्टा॑। प॒त्स्विति॑ प॒त्ऽसु। ज॒वम्। द॒धा॒तु॒ ॥८॥

Mantra without Swara
वातरँहा भव वाजिन्युज्यमान इन्द्रस्येव दक्षिणः श्रियैधि । युञ्जन्तु त्वा मरुतो विश्ववेदस आ ते त्वष्टा पत्सु जवन्दधातु ॥

वातरꣳहा इति वातऽरꣳहाः। भव। वाजिन्। युज्यमानः। इन्द्रस्येवेतीन्द्रस्यऽइव। दक्षिणः। श्रिया। एधि। युञ्जन्तु। त्वा। मरुतः। विश्ववेदस इति विश्वऽवेदसः। आ। ते। त्वष्टा। पत्स्विति पत्ऽसु। जवम्। दधातु॥८॥

Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. पिछले मन्त्र में कहा था कि ‘सेनापति, मुख्यमन्त्री तथा सत्ताईस सभासद’ राष्ट्रपति को नियुक्त करते हैं। अब वे कहते हैं—हे ( वाजिन् ) = शक्तिशालिन्! राष्ट्र के अग्रभाग में नियुक्त हुआ-हुआ तू ( वातरंहाः ) = वायु के समान वेगवाला ( भव ) = हो। राजा आलसी व विलासी होगा तो वह राष्ट्र की क्या रक्षा करेगा? 

२. ( दक्षिणः ) = कार्यकुशल बनकर तू ( इन्द्रस्य इव ) = इन्द्र के समान ( श्रिया एधि ) = श्री से सम्पन्न हो। राजा बिना कोश के राजा ही नहीं रहता। राजा को कोश की वृद्धि के लिए पूर्ण प्रयत्न करना है। कार्यकुशलता ही कोशवृद्धि में सहायक होगी। 

३. ( त्वा ) = तुझे ( मरुतः ) = प्राणसाधना करनेवाले तथा ( विश्ववेदसः ) = सम्पूर्ण ज्ञानवाले पुरुष ( युञ्जन्तु ) =  विभिन्न कार्यों में युक्त करें, अथवा ऐसे पुरुषों के साथ तेरा मेल हो। तेरे अध्यक्षादि सब प्राणापान के अभ्यासी व ज्ञानी हों। प्राणसाधना उनके इन्द्रिय-दोषों का दहन करनेवाली होगी तथा ज्ञान उनको ठीक तरीके से काम करने के योग्य बनाएगा। राजा को मूर्ख अध्यक्ष मिल जाएँ तो राष्ट्रसहित उसका नाश ही कर देंगे। 

४. ( त्वष्टा ) = देवशिल्पी, अर्थात् तेरे राष्ट्र के वैज्ञानिक कारीगर ( ते पत्सु ) = तेरे पाँव में ( जवम् ) = वेग को ( आदधातु ) = स्थापित करे, अर्थात् तेरे लिए इस प्रकार का वाहन [ Motor car ] बना दे कि तू शीघ्रता से राष्ट्र के एक भाग से दूसरे भाग में पहुँच सके।
Essence
भावार्थ — १. राजा वायु के समान वेगवाला हो, शीघ्रता से कार्य करनेवाला हो। २. वह कार्यकुशलता से श्री की वृद्धि करे। ३. उसके अध्यक्ष ज्ञानी व प्राणायाम के अभ्यासी हों। ४. राष्ट्र सर्वत्र गमन-आगमन के लिए उसके वाहन वेगयुक्त हों।
Subject
वातरंहाः