Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Yajurveda Adhyay 9 / Mantra 40

40 Mantra
9/40
Devata- यजमानो देवता Rishi- देवावत ऋषिः Chhand- स्वराट ब्राह्मी त्रिष्टुप्, Swara- धैवतः
Mantra with Swara
इ॒मं दे॑वाऽअस॒पत्नꣳ सु॑वध्वं मह॒ते क्ष॒त्राय॑ मह॒ते ज्यैष्ठ्या॑य मह॒ते जान॑राज्या॒येन्द्र॑स्येन्द्रि॒याय॑। इ॒मम॒मुष्य॑ पु॒त्रम॒मुष्यै॑ पु॒त्रम॒स्यै वि॒शऽए॒ष वो॑ऽमी॒ राजा॒ सोमो॒ऽस्माकं॑ ब्राह्म॒णाना॒ राजा॑॥४०॥

इ॒मम्। दे॒वाः॒। अ॒स॒प॒त्नम्। सु॒व॒ध्व॒म्। म॒ह॒ते। क्ष॒त्राय॑। म॒ह॒ते। ज्यैष्ठ्या॑य। म॒ह॒ते। जान॑राज्या॒येति॒ जान॑ऽराज्याय। इन्द्र॑स्य। इ॒न्द्रि॒याय॑। इ॒मम्। अ॒मुष्य॑। पु॒त्रम्। अ॒मुष्यै॑। पु॒त्रम्। अ॒स्यै। वि॒शे। ए॒षः। वः॒। अ॒मी॒ऽइत्य॑मी। राजा॑। सोमः॑। अ॒स्माक॑म्। ब्रा॒ह्म॒णाना॑म्। राजा॑ ॥४०॥

Mantra without Swara
इमन्देवा ऽअसुपत्नँ सुवध्वम्महते क्षत्राय महते ज्यैष्ठ्याय महते जानराज्यायेन्द्रय । इमममुष्य पुत्रममुष्यै पुत्रमस्यै विशऽएष वोमी राजा सोमो स्माकम्ब्राह्मणानाँ राजा ॥

इमम्। देवाः। असपत्नम्। सुवध्वम्। महते। क्षत्राय। महते। ज्यैष्ठ्याय। महते। जानराज्यायेति जानऽराज्याय। इन्द्रस्य। इन्द्रियाय। इमम्। अमुष्य। पुत्रम्। अमुष्यै। पुत्रम्। अस्यै। विशे। एषः। वः। अमीऽइत्यमी। राजा। सोमः। अस्माकम्। ब्राह्मणानाम्। राजा॥४०॥

Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
पुरोहित चुनाव के समय एकत्र विद्वानों से कहता है कि १. हे ( देवाः ) = ज्ञान से दीप्त प्रजा के प्रतिनिधियो! ( इमम् ) = इस निर्दिश्यमान व्यक्ति को ( असपत्नम् ) = ऐकमत्य से, बिना किसी सपत्न rival के ( सुवध्वम् ) = चुनो। ऐकमत्य से चुना गया राजा ही सारी प्रजा की शक्ति को अपने में केन्द्रित कर पाता है। वही कुछ कार्य कर पाएगा। 

२. इसे चुनो ( महते क्षत्राय ) = क्षतों से त्राणरूप महान् कार्य के लिए। यह राजा राष्ट्र को सब प्रकार के आघातों से बचाएगा। 

३. ( महते ज्यैष्ठ्याय ) = महान् बड़प्पन के लिए। यह राजा राष्ट्र को संसार में उच्च स्थान प्राप्त कराएगा। 

४. ( महते जानराज्याय ) = महान् जनराज्य के लिए। यह राजा जनहित के दृष्टिकोण से ही राज्य करेगा। 

५. ( इन्द्रस्य इन्द्रियाय ) = इन्द्र के वीर्य के लिए। इस राजा ने स्वयं जितेन्द्रिय बनकर शक्ति का सम्पादन किया है। यह राष्ट्र में ऐसा ही वातावरण उत्पन्न करने का ध्यान करेगा कि लोग जितेन्द्रिय बनकर शक्तिशाली बनें। एवं, यह राजा आपसे चुना जाकर [ क ] राष्ट्र को आघातों से बचाएगा। [ ख ] ज्येष्ठता प्राप्त कराएगा। [ ग ] शासन में लोकहित के दृष्टिकोण को अपनाएगा। [ घ ] और यह प्रयत्न करेगा कि लोग जितेन्द्रिय बनकर शक्तिशाली बनें। 

६. अतः आप सब ( इमम् ) = इसे [ इस नामवाले को ] ( अमुष्यपुत्रम् ) = अमुक पिता के पुत्र को ( अमुष्यै पुत्रम् ) = अमुक माता के पुत्र को ( अस्यै विशे ) = इस प्रजा के हित के लिए चुनो। 

७. ( एषः ) = आपसे चुना जाकर ( अमी ) = हे प्रजाओ! यह ( वः ) = आपका ( राजा ) = राजा है। आपने इसके आदेशों के अनुसार चलना है। ( अस्माकं ब्राह्मणानाम् ) = हम ब्राह्मणों का ( राजा ) = नियन्ता तो ( सोमः ) = वह सर्वज्ञ शान्त प्रभु ही है। राजा इन ब्रह्मनिष्ठ लोगों के निर्देशानुसार शासन करने का प्रयत्न करता है।
Essence
भावार्थ — राजा का चुनाव सर्वसम्मति से हो तो अच्छा है। वह राष्ट्र को आघातों से बचाये, ज्येष्ठ बनाये, लोकहित के दृष्टिकोण से राज्य करे और प्रयत्न करे कि लोग इन्द्रियों के दास न होकर शक्ति-सम्पन्न बनें। ब्रह्मनिष्ठ व्यक्तियों के कथनानुसार चलें।
Subject
चुनाव