Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Yajurveda Adhyay 8 / Mantra 61

63 Mantra
8/61
Devata- विश्वेदेवा देवताः Rishi- वसिष्ठ ऋषिः Chhand- ब्राह्मी उष्णिक्, Swara- ऋषभः
Mantra with Swara
चतु॑स्त्रिꣳश॒त् तन्त॑वो॒ ये वि॑तत्नि॒रे य इ॒मं य॒ज्ञ स्व॒धया॒ दद॑न्ते। तेषां॑ छि॒न्नꣳ सम्वे॒तद्द॑धामि॒ स्वाहा॑ घ॒र्मोऽअप्ये॑तु दे॒वान्॥६१॥

चतु॑स्त्रिꣳश॒दिति॒ चतुः॑ऽत्रिꣳशत्। तन्त॑वः। ये। वि॒त॒त्नि॒र इति॑ विऽतत्नि॒रे। ये। इ॒मम्। य॒ज्ञम्। स्व॒धया॑। दद॑न्ते। तेषा॑म्। छि॒न्नम्। सम्। ऊँ॒ऽइत्यूँ॑। ए॒तत्। द॒धा॒मि॒। स्वाहा॑। घ॒र्मः। अपि॑। ए॒तु॒। दे॒वान् ॥६१॥

Mantra without Swara
चतुस्त्रिँशत्तन्तवो ये वितत्निरे य इमँ यज्ञँ स्वधया ददन्ते । तेषाय्छिन्नँ सम्वेतद्दधामि स्वाहा घर्मा ऽअप्येतु देवान् ॥

चतुस्त्रिꣳशदिति चतुःऽत्रिꣳशत्। तन्तवः। ये। वितत्निर इति विऽतत्निरे। ये। इमम्। यज्ञम्। स्वधया। ददन्ते। तेषाम्। छिन्नम्। सम्। ऊँऽइत्यूँ। एतत्। दधामि। स्वाहा। घर्मः। अपि। एतु। देवान्॥६१॥

Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. मन्त्र ५३ से ५९ के पूर्वार्ध तक जीवन के ३४ सूत्रों का वर्णन हुआ है। ये ३४ सूत्र ही जीवन का उत्तमता से धारण करते हैं। ( ये ) = जो ( चतुस्त्रिंशत् ) = ३४ ( तन्तवः ) = सूत्र ( वितत्निरे ) = विशेषरूप से फैले हुए हैं ( ये ) = जो सूत्र ( इमं यज्ञम् ) = इस सृष्टि-यज्ञ को और तदन्तर्गत हमारे जीवन-यज्ञ को ( स्वधया ) = अपनी धारणशक्ति से ( ददन्ते ) = धारण करते हैं [ दद दानधारणयोः ], ( तेषाम् ) = उन सूत्रों का ( छिन्नम् ) = जो भी कुछ अंश टूटता है ( उ ) = निश्चय से ( एतत् ) = इसको ( संदधामि ) = ठीक-ठीक कर देता हूँ, अर्थात् मैं यथासम्भव जीवन के नियमों का पालन करता हूँ, उनमें होनेवाली त्रुटियों को दूर करता हूँ। 

२. इन त्रुटियों के दूरीकरण के लिए ( स्वाहा ) = मैं अपने [ स्व+हा ] स्वार्थ का त्याग करता हूँ। स्वार्थ ही त्रुटियों का कारण हुआ करता है। स्वार्थ के दूर करने से त्रुटियाँ दूर हो जाती हैं। 

३. त्रुटियों के दूर होने पर मनुष्य का जीवन दिव्य बनता है। इन ( देवान् ) = देवों को—दिव्य गुणयुक्त जीवनवालों को ( घर्मः ) = [ Heat, Warmth, Sunshine ] शक्ति की उष्णता व ज्ञान का प्रकाश प्राप्त होता है। 

४. संक्षेप में संसार के धारण करनेवाले ३४ सूत्र हैं। ये ही वैयक्तिक जीवन के नियम हैं। इनके पालन में त्रुटि न आने देना ही हमारा कर्त्तव्य है। जब इनका पालन ठीक प्रकार से होता है तब जीवन में शक्ति की उष्णता व ज्ञान का प्रकाश दोनों उपस्थित होते हैं।
Essence
भावार्थ — हम अपने जीवनों को नियमबद्ध करने का प्रयत्न करें।
Subject
चौंतीस सूत्र