Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Yajurveda Adhyay 7 / Mantra 2

48 Mantra
7/2
Devata- सोमो देवता Rishi- गोतम ऋषिः Chhand- निचृत् आर्षी पङ्क्ति, Swara- निषादः
Mantra with Swara
मधु॑मतीर्न॒ऽइष॑स्कृधि॒ यत्ते॑ सो॒मादा॑भ्यं॒ नाम॒ जागृ॑वि॒ तस्मै॑ ते सोम॒ सोमा॑य॒ स्वाहा॒ स्वाहो॒र्वन्तरि॑क्ष॒मन्वे॑मि॥२॥

मधु॑मती॒रिति॒ मधु॑ऽमतीः। नः॒। इषः॑। कृ॒धि॒। यत्। ते॒। सो॒म॒। अदा॑भ्यम्। नाम॑। जागृ॑वि। तस्मै॑। ते॒। सो॒म॒। सोमा॑य। स्वाहा॑। स्वाहा॑। उ॒रु। अ॒न्तरि॑क्षम्। अनु॑। ए॒मि॒ ॥२॥

Mantra without Swara
मधुमतीर्नऽइषस्कृधि यत्ते सोमादाभ्यन्नाम जागृवि तस्मै ते सोम सोमाय स्वाहा स्वाहोर्वन्तरिक्षमन्वेमि ॥

मधुमतीरिति मधुऽमतीः। नः। इषः। कृधि। यत्। ते। सोम। अदाभ्यम्। नाम। जागृवि। तस्मै। ते। सोम। सोमाय। स्वाहा। स्वाहा। उरु। अन्तरिक्षम्। अनु। एमि॥२॥

Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. पिछले मन्त्र में प्रभु को हृदयासीन करने के लिए गोतम ने अपने जीवन को अधिकाधिक पवित्र करने का प्रयत्न किया। यह गोतम प्रभु से प्रार्थना करता है कि हे ( सोम ) = हृदयस्थ शान्त प्रभो! आप ( नः ) = हमारे लिए ( मधुमतीः इषः ) = अत्यन्त माधुर्य से पूर्ण प्रेरणाओं को ( कृधि ) = कीजिए। हमारे जीवनों में, हमारे व्यवहारों में ये प्रेरणाएँ माधुर्य भरने- वाली हों। 

२. हे ( सोम ) = प्रभो! ( यत् ) = जो ( ते ) = तेरा ( अदाभ्यम् ) = हिंसित न होने देनेवाला ( जागृवि ) =  सदा सावधान, पहरेदार की भाँति रक्षा करनेवाला ( नाम ) = नाम है, उसे हे सोम ! ( तस्मै ते सोमाय ) = उस तुझ सोम को प्राप्त करने के लिए ( स्वाहा ) = [ सु+आह ] मैं सुन्दरता से उच्चारण करता हूँ। प्रभु-नाम का उच्चारण मुझे एकाग्र करेगा और अपने अन्दर उस शान्तात्मा प्रभु को देखने के योग्य बनाएगा। 

३. मैं ( स्वाहा ) = स्वार्थ का त्याग [ स्व+हा ] करता हूँ और ( अन्तरक्षिं अन्वेमि ) = विशाल हृदयान्तरिक्ष को प्राप्त करता हूँ, स्वार्थ की भावनाओं से ऊपर उठकर हृदय को विशाल बनाता हूँ।
Essence
भावार्थ — प्रभु का नाम-स्मरण करने से हम वासनाओं व रोगों के शिकार नहीं होते। यह नाम हमारा सदा जागरित रक्षक बन जाता है। हम नाम का सुन्दरता से उच्चारण करें, जिससे उस सोम = शान्तस्वरूप प्रभु को प्राप्त कर सकें। हम स्वार्थ-त्याग करके अपने हृदयान्तरिक्ष को विशाल बनाएँ।
Subject
नाम-स्मरण