Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Yajurveda Adhyay 4 / Mantra 3

37 Mantra
4/3
Devata- मेघो देवता Rishi- प्रजापतिर्ऋषिः Chhand- स्वराट् अनुष्टुप्, Swara- धैवतः
Mantra with Swara
म॒हीनां॒ पयो॑ऽसि वर्चो॒दाऽअ॑सि॒ वर्चो॑ मे देहि। वृ॒त्रस्या॑सि क॒नीन॑कश्चक्षु॒र्दाऽअ॑सि॒ चक्षु॑र्मे देहि॥३॥

म॒हीनाम्। पयः॑। अ॒सि॒। व॒र्चो॒दा इति॑ वर्चः॒ऽदाः। अ॒सि॒। वर्चः॑। मे॒। दे॒हि॒। वृ॒त्रस्य॑। अ॒सि॒। क॒नीन॑कः। च॒क्षु॒र्दा इति॑ चक्षुः॒दाः। अ॒सि॒। चक्षुः॑। मे॒। दे॒हि॒ ॥३॥

Mantra without Swara
महीनांम्पयोसि वर्चादा असि वर्चा मे देहि वृत्रस्यासि कनीनकश्चक्षुर्दा असि चक्षुर्मे देहि ॥

महीनाम्। पयः। असि। वर्चोदा इति वर्चःऽदाः। असि। वर्चः। मे। देहि। वृत्रस्य। असि। कनीनकः। चक्षुर्दा इति चक्षुःदाः। असि। चक्षुः। मे। देहि॥३॥

Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. पिछले मन्त्र में जल का वर्णन था। प्रस्तुत मन्त्र में सर्वोत्तम जल अर्थात् मेघस्थ जल का उल्लेख करते हैं। यह मेघ क्या है। ( महीनाम् ) = इन पृथिवियों का [ पृथिवी-भागों का ] ( पयः असि ) = जल है। यह पृथिवीस्थ जल ही सूर्य किरणों व अन्य भौतिक कारणों से वाष्पीभूत होकर ऊपर चला गया है। एवं, यह distilled water ही है। अत्यन्त शुद्ध व अत्यन्त स्वास्थ्यप्रद। इसे देवताओं के मद्य के रूप में कहा गया है—‘पिबेदमरवारुणीम्’। यह जल क्या है ? यह तो ( महीनां पयः असि ) = गौवों का दूध है। इसमें इतनी शक्ति है जितनी गोदुग्ध में। ( वर्चोदा ) = यह वर्चस् को देनेवाला है। ( वर्चो मे देहि ) = हे मेघजल! तू मुझे वर्चस् दे। ‘वर्चस्’ वह शक्ति है जो रोगों का मुकाबला करती है। रोगकृमियों के नाश के द्वारा यह मनुष्य को स्वस्थ बनाती है। 

२. ‘वृत्र’ शब्द आवरण का वाचक है। मेघ भी वृत्र है, क्योंकि सूर्य पर एक आवरण के रूप में आ जाता है। काम भी वृत्र है, क्योंकि वह ज्ञान का आवरक बनता है। इसी प्रकार आँख पर परदे के रूप में आ जानेवाला ‘मोतियाबिन्द’ [ Catarect ] भी वृत्र कहलाता है। ये मेघजल इस ( वृत्रस्य ) = आँख पर अँधेरे के रूप में आ जानेवाले मोतियाबिन्द को ( कनीनकः असि ) = फिर से चमका देनेवाला है [ कन् to shine ]। ‘मेघजल का प्रयोग किस प्रकार कैटेरेक्ट को दूर करता है ?’  यह प्रश्न वैद्य से सम्मति लेकर सुलझाना चाहिए, परन्तु यह बात निश्चित है कि पीने के लिए मेघजल का ही प्रयोग करने पर इस रोग की आशंका ही न रहेगी। 

३. हे मेघ ! तू मोतियाबिन्द को हटाकर ( मे ) = मुझे ( चक्षुः ) = फिर से दृष्टिशक्ति ( देहि ) = दे।
Essence
भावार्थ — मेघजल या distilled water के प्रयोग से निम्न लाभ होते हैं— १. यह गोदुग्ध के समान शक्ति को देनेवाला है। २. मोतियाबिन्द को नहीं होने देता। ३. दृष्टिशक्ति को बढ़ानेवाला है।
Subject
मेघ = मेघस्थ जल