Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Yajurveda Adhyay 4 / Mantra 28

37 Mantra
4/28
Devata- अग्निर्देवता Rishi- वत्स ऋषिः Chhand- साम्नी बृहती,साम्नी उष्णिक्, Swara- मध्यमः
Mantra with Swara
परि॑ माग्ने॒ दुश्च॑रिताद् बाध॒स्वा मा॒ सुच॑रिते भज। उदायु॑षा स्वा॒युषोद॑स्थाम॒मृताँ॒२ऽअनु॑॥२८॥

परि॑। मा॒। अ॒ग्ने॒। दुश्च॑रिता॒दिति॒ दुःऽच॑रितात्। बा॒ध॒स्व॒। आ। मा॒। सुच॑रित॒ इति॒ सुऽच॑रिते। भ॒ज॒। उत्। आयु॑षा। स्वा॒युषेति॑ सुऽआ॒युषा॑। उत्। अ॒स्था॒म्। अ॒मृता॑न्। अनु॑ ॥२८॥

Mantra without Swara
परि माग्ने दुश्चरिताद्बाधस्वा मा सुचरिते भज । उदायुषा स्वायुषोदस्थाममृताँ अनु ॥

परि। मा। अग्ने। दुश्चरितादिति दुःऽचरितात्। बाधस्व। आ। मा। सुचरित इति सुऽचरिते। भज। उत्। आयुषा। स्वायुषेति सुऽआयुषा। उत्। अस्थाम्। अमृतान्। अनु॥२८॥

Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. पिछले मन्त्र में कही गई सात बातों को सुनकर उपासक प्रभु से कहता है कि यह सब आपकी कृपा से ही होगा। हे ( अग्ने ) = मेरे सारे पापों का दहन करनेवाले प्रभो! आप अग्निरूप हैं। अग्नि में पड़कर जैसे सब मलों के भस्म हो जाने से सोना शुद्ध होकर चमक उठता है, इसी प्रकार आपमें पड़कर ही तो मैं निष्पाप बनकर चमक सकूँगा। आप ( मा ) = मुझे ( दुश्चरितात् ) = सब दुराचारों व दुर्वृत्तियों से ( परिबाधस्व ) = रोकिए। ये दुर्वृत्तियाँ मुझसे दूर रहें। आप ( मा ) = मुझे ( सुचरिते ) = उत्तम चरित्र में ( आभज ) = भागी बनाइए। आपकी कृपा से मैं उत्तम बातों का ही सेवन करनेवाला बनूँ—दुराचार से दूर, सदाचार के समीप। 

२. ( उदायुषा ) = [ उत् = out उद् इ = outlive ] सब रोगों को पार करते हुए दीर्घजीवन से तथा ( स्वायुषा ) = उत्तम दिव्य [ सु ] जीवन से मैं ( उद् अस्थाम् ) = इन दीर्घ व दिव्य जीवनवालों की श्रेणी में ऊपर ठहरूँ। दुराचार से दूर व सदाचार के समीप होकर मनुष्य दीर्घ व दिव्य जीवन को प्राप्त करता है। मन्त्र में शब्दक्रम के द्वारा यह कार्यकारणभाव स्पष्ट है। निष्पापता से ही दीर्घजीवन मिलता है। 

३. ( अमृतान् अनु ) = मैं सांसारिक प्रलोभनों के पीछे न मरनेवाले देवों के पीछे ही चलनेवाला होऊँ।
Essence
भावार्थ — प्रभुकृपा से मेरा जीवन दुराचार से दूर व सदाचार के समीप होकर दीर्घ व दिव्य बने।
Subject
उदायुः - स्वायुः