Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Yajurveda Adhyay 37 / Mantra 13

21 Mantra
37/13
Devata- विद्वान् देवता Rishi- दध्यङ्ङाथर्वण ऋषिः Chhand- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
स्वाहा॑ म॒रुद्भिः॒ परि॑ श्रीयस्व दि॒वः स॒ꣳस्पृश॑स्पाहि।मधु॒ मधु॒ मधु॑॥१३॥

स्वाहा॑। म॒रुद्भि॒रिति॑ म॒रुत्ऽभिः॑। परि॑। श्री॒य॒स्व॒। दि॒वः। स॒ꣳस्पृश॒ इति॑ स॒म्ऽस्पृशः॑। पा॒हि॒ ॥ मधु॑। मधु॑। मधु॑ ॥१३ ॥

Mantra without Swara
स्वाहा मरुद्भिः परिश्रीयस्व । दिवः सँस्पृशस्पाहि । मधु मधु मधु ॥

स्वाहा। मरुद्भिरिति मरुत्ऽभिः। परि। श्रीयस्व। दिवः। सꣳस्पृश इति सम्ऽस्पृशः। पाहि॥ मधु। मधु। मधु॥१३॥

Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
पिछले मन्त्र में पति के 'अग्नि' तुल्य होने का उल्लेख है । अग्नि की पत्नी 'स्वाहा' है, अतः प्रस्तुत मन्त्र में पत्नी को 'स्वाहा' कहा गया है। पति कहता है कि तू १. (स्वाहा) = [ स्व + हा] अपना उत्तम त्याग करनेवाली है। पत्नी के जीवन का प्रारम्भ ही त्याग से होता है। वह अपने सारे घर-बार को छोड़कर एक नये घर का निर्माण करने के लिए पग उठाती है। सामान्यतः सबको खिला-पिलाकर खाने का ध्यान करती है। अपने लिए बचे या न बचे, वह बच्चों का पूरा ध्यान करती है। माता बच्चे के पोषण के लिए अपने सारे आराम को समाप्त कर देती है। वस्तुतः माता के त्याग पर ही घर का निर्माण होता है । २. (मरुद्भिः) = प्राणों से (परिश्रीयस्व) = तू सेवित हो, अर्थात् तू प्राणशक्ति से युक्त हो। माता निर्बल हो तो सन्तान भी निर्बल होगी। माता के स्वास्थ्य पर ही बच्चों का स्वास्थ्य निर्भर वह करता है। ३. (दिवः) = [दिव्= स्वप्न] दिवास्वप्न के (संस्पृशः) = सम्पर्क से (पाहि) = अपने को (ह) = तू बचानेवाली हो, चूँकि 'दिवा स्वपन्त्याः स्वापशील:' इस ब्राह्मणवाक्य के अनुसार दिन में सोनेवाली माता का बच्चा भी सोंदू ही होगा। 'दिव्' शब्द द्यूत, जूए की प्रवृत्ति का भी संकेत करता है। माता के अन्दर नाममात्र भी जूए से धन प्राप्ति की कामना न हो, सदा पुरुषार्थजन्य धन को ही चाहे। माता में द्यूत प्रवृत्ति होने पर बच्चा भी कुछ जुआरी व सट्टेबाज ही बनेगा । ४. सबसे बढ़कर आवश्यक बात यह है कि मधु मधु (मधु) = तूने मधुर बनना, शहद के समान मधुर वचनोंवाली होना, तेरा व्यवहार माधुर्य से परिपूर्ण हो ।
Essence
भावार्थ- आदर्श पत्नी में त्याग, प्राणशक्ति, पुरुषार्थ व माधुर्य का निवास होता है।
Subject
पति की कामना