Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Yajurveda Adhyay 35 / Mantra 2

22 Mantra
35/2
Devata- सविता देवता Rishi- आदित्या देवा ऋषयः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
स॒वि॒ता ते॒ शरी॑रेभ्यः पृथि॒व्यां लो॒कमि॑च्छतु।तस्मै॑ युज्यन्तामु॒स्रियाः॑॥२॥

स॒वि॒ता। ते॒ शरी॑रेभ्यः। पृ॒थि॒व्याम्। लो॒कम्। इ॒च्छ॒तु॒ ॥ तस्मै॑। यु॒ज्य॒न्ता॒म्। उ॒स्रियाः॑ ॥२ ॥

Mantra without Swara
सविता ते शरीरेभ्यः पृथिव्याँल्लोकमिच्छतु । तस्मै युज्यन्तामुस्रियाः ॥

सविता। ते शरीरेभ्यः। पृथिव्याम्। लोकम्। इच्छतु॥ तस्मै। युज्यन्ताम्। उस्रियाः॥२॥

Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
'घर में सब लोग स्वस्थ हों, घर का विकास [प्रसव व उत्पत्ति] हो तथा ऐश्वर्य की कमी न हो' इसके लिए सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि घर में सूर्यकिरणों का सम्पर्क अविच्छिन्न हो। सूर्य का नाम सविता है, यह 'षु प्रसवैश्वर्ययो: ' सब प्रसव [Growth] व ऐश्वर्य का करनेवाला है। मन्त्र में कहते हैं कि (सविता) = यह सूर्य (ते) = तेरे (शरीरेभ्यः) = शरीरों के लिए (पृथिव्याम्) = इस पृथिवी पर (लोकम्) = आलोक-प्रकाश को (इच्छतु) = चाहे । (तस्मै) = उस तेरे लिए (उस्त्रिया:) = सूर्यकिरणें (युज्यन्ताम्) = युक्त हों, सदा उपयोग की वस्तु बनें [युज् = use] जिस घर में सूर्यकिरणों का प्रवेश ठीक प्रकार से होता है उस घर में रोग नहीं घुस पाते, इसलिए हमारे घर ऐसे ही बनने चाहिए जिनमें सूर्यकिरणें सदा आ सकें।
Essence
भावार्थ- 'घरों में रोगों का प्रवेश न हो, इसके लिए यह अत्यन्त आवश्यक है कि उनमें सूर्य की किरणों का प्रवेश अव्याहतरूप से हो।
Subject
सूर्य किरणें