Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Yajurveda Adhyay 33 / Mantra 62

97 Mantra
33/62
Devata- सोमो देवता Rishi- देवल ऋषिः Chhand- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
उपा॑स्मै गायता नरः॒ पव॑माना॒येन्द॑वे।अ॒भि दे॒वाँ२ऽइय॑क्षते॥६२॥

उप॑। अ॒स्मै॒। गा॒य॒त॒। न॒रः॒। पव॑मानाय। इन्द॑वे। अ॒भि। दे॒वान्। इय॑क्षते ॥६२ ॥

Mantra without Swara
उपास्मै गायता नरः पवमानायेन्दवे । अभि देवाँऽइयक्षते ॥

उप। अस्मै। गायत। नरः। पवमानाय। इन्दवे। अभि। देवान्। इयक्षते॥६२॥

Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. प्रस्तुत मन्त्र का ऋषि देवल है- देवों का लेनेवाला-दिव्य गुणों को अपने अन्दर बढ़ानेवाला । यह अपने को दिव्य गुणों का पुञ्ज बना पाया है, क्योंकि इसने प्रभु का उपासन किया है। यह कहता है कि २. हे (नरः) = अपने को उन्नतिपथ पर [नृ नये] लेचलनेवाले लोगो! (अस्मै) = इस प्रभु के लिए उपगायत - समीपता से गायन करो। घर में सब मिलकर बैठें और उस प्रभु का स्तवन करें। यही एकमात्र उपाय है जिससे कि हमारा जीवन बुराइयों से बचा रहता है। हम गुणों से युक्त होकर अपने जीवन को प्रभु-गुणगान से ही सुन्दर बना पाते हैं, अतः उस प्रभु के लिए गायन करो जो ३. (पवमानाय) = पवित्र करनेवाले हैं। प्रभु गुणगान से हमारा जीवन पवित्र बनेगा। प्रातः प्रभु के समीप बैठ, हम उसका गुणगान करें । ४. (इन्दवे) = शक्तिशाली प्रभुके लिए गुणगान करो। प्रभु का गुणगान हममें शक्ति भरेगा । ५. उस प्रभु का गान करो जो हमें (देवान् अभि इयक्षते) = देवों की ओर ले चलनेवाले हैं। प्रभु का गुणगान हमें प्रेरणा देगा और हमारे जीवन को दिव्य गुणों से भर देगा। दिव्य गुणों को प्राप्त करके हम प्रस्तुत मन्त्र के ऋषि 'देवल' बनेंगे।
Essence
भावार्थ- प्रभु-उपासन के तीन लाभ हैं- 'पवित्रता, शक्ति व दिव्यता' ।
Subject
उपासना के तीन लाभ