Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Yajurveda Adhyay 3 / Mantra 57

63 Mantra
3/57
Devata- रुद्रो देवता Rishi- बन्धुर्ऋषिः Chhand- अनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
ए॒ष ते॑ रुद्र भा॒गः स॒ह स्वस्राम्बि॑कया॒ तं जु॑षस्व॒ स्वाहै॒ष ते॑ रुद्र भा॒गऽआ॒खुस्ते॑ प॒शुः॥५७॥

ए॒षः। ते॒। रु॒द्र॒। भा॒गः। स॒ह। स्वस्रा॑। अम्बि॑कया। तम्। जु॒ष॒स्व॒। स्वाहा॑। ए॒षः। ते॒। रु॒द्र॒। भा॒गः। आ॒खुः। ते॒। प॒शुः ॥५७॥

Mantra without Swara
एष ते रुद्र भागः सह स्वस्राम्बिकया तञ्जुषस्व स्वाहैष ते रुद्र भाग आखुस्ते पशुः ॥

एषः। ते। रुद्र। भागः। सह। स्वस्रा। अम्बिकया। तम्। जुषस्व। स्वाहा। एषः। ते। रुद्र। भागः। आखुः। ते। पशुः॥५७॥

Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. गत मन्त्रों में वर्णित मनोनिरोध के लिए प्राणसाधना मौलिक उपाय है। प्राणायाम से ‘चित्तवृत्तिनिरोध’ होकर मन का वशीकरण होता है, अतः प्रस्तुत मन्त्र को प्राणसाधना से प्रारम्भ किया गया है। हे ( रुद्र ) = प्राण! [ रुद्राः प्राणाः ] ( एषः ) = ये प्रभु ( ते ) = तेरा ( भागः ) = भाग हैं—सेवनीय हैं। तूने प्रभु की ही उपासना करनी है। 

२. प्राणों के द्वारा प्रभु का उपासन यही है कि प्राणसाधना से मनोनिरोध होता है और मनोनिरोध से प्रभु-साक्षात्कार। 

३. ( तम् ) = उस प्रभु को ( स्वस्रा ) = [ सु+अस् ] उत्तमता से सब दोषों को परे फेंकनेवाली ( अम्बिकया सह ) = [ अवि शब्दे ] इस शब्दविद्या = वेदवाणी के साथ ( जुषस्व ) = प्रीतिपूर्वक सेवन कर। ज्ञानयज्ञ से प्रभु का उपासन सर्वोत्तम उपासन है। ( स्वाहा ) = [ सु+आह ] यह बात बहुत ही सुन्दर कही गई है। 

४. हे ( रुद्र ) = प्राण! ( एष ) = यह प्रभु ही ( ते ) = तेरा ( भागः ) = उपासनीय—भजनीय है। यह ( ते ) =  तेरा ( आखु ) = [ आखमति = अवदारयति ] सब दोषों का सुदूर विदीर्ण करनेवाला है। ( ते पशुः ) [ पश्यति ] = यह तेरा द्रष्टा है। तेरे दोषों का देखनेवाला और उनका नाश करनेवाला है। तू अपने दोषों को देख पाये या न, परन्तु प्रभु तो तेरे दोषों को देखते ही हैं। उनसे तेरा कोई दोष छिपा नहीं। वे तेरे इन सब दोषों को उखाड़ फेंकेंगे—भस्म कर देंगे।
Essence
भावार्थ — प्रभु ही सेवनीय हैं, ज्ञान-प्राप्ति से उनका उपासन होता है। वे प्रभु ही हमारे दोषों के द्रष्टा व नाशक हैं।
Subject
आखुस्ते पशुः