Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Yajurveda Adhyay 3 / Mantra 14

63 Mantra
3/14
Devata- अग्निर्देवता Rishi- देववातभरतावृषी Chhand- निचृत् अनुष्टुप्, Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
अ॒यं ते॒ योनि॑र्ऋ॒त्वियो॒ यतो॑ जा॒तोऽअरो॑चथाः। तं जा॒नन्न॑ग्न॒ऽआरो॒हाथा॑ नो वर्द्धया र॒यिम्॥१४॥

अ॒यम्। ते॒। योनिः॑। ऋ॒त्वियः॑। यतः॑। जा॒तः। अरो॑चथाः। तम्। जा॒नन्। अ॒ग्ने॒। आ। रो॒ह॒। अथ॑। नः॒। व॒र्द्ध॒य॒। र॒यिम् ॥१४॥

Mantra without Swara
अयन्ते योनिरृत्वियो यतो जातो अरोचथाः । तञ्जानन्नग्नऽआरोहाथा नो वर्धया रयिम् ॥

अयम्। ते। योनिः। ऋत्वियः। यतः। जातः। अरोचथाः। तम्। जानन्। अग्ने। आ। रोह। अथ। नः। वर्द्धय। रयिम्॥१४॥

Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. पिछले मन्त्र में वर्णित पति-पत्नी निम्न प्रकार से प्रभु-पूजन करते हैं— १. हे प्रभो! ( अयम् ) = यह ( योनिः ) = घर ( ते ) = तेरा ही है। इसमें आपका ही उपासन चलता है। ( ऋत्वियः ) =  [ ऋतौ ऋतौ प्राप्तः—काले काले भवति ] इसमें आपका ही उपासन समय-समय पर होता है। यह वह घर है, ( यतः ) = जहाँ से ( जातः ) = प्रादुर्भूत हुए आप ( अरोचथाः ) = चमकते हो, अर्थात् इस घर में होनेवाला आपका स्तवन चारों ओर आपके यश को फैलानेवाला होता है। चारों ओर के वातावरण में भी आपके गुण-कीर्तन की वृत्ति परिपूर्ण हो उठती है। हमारा घर आपके गुण-कीर्तन का केन्द्र बनता है। 

२. ( तम् ) = उस हमारे घर को ( जानन् ) = जानते हुए, अर्थात् इस घर पर अपनी कृपादृष्टि रखते हुए ( अग्ने ) = हे उन्नतिसाधक प्रभो! इसे ( आरोह ) = [ उन्नतिं गमय—द० ] उन्नति को प्राप्त कराइए। आपकी कृपा से यह घर सदा उन्नत होता चले। इसमें सम्पत्ति की कमी न हो। इस घर में दान-प्रवाह सदा चलता रहे और इस घर के लोग क्षीणशक्ति न हो जाएँ। ( अथ ) = अब ( नः रयिम् ) = हमारी सम्पत्ति को ( वर्धय ) = बढ़ाइए।

३. इस घर में सदा देवताओं के ( श्रव ) = यश का कीर्तन होता है, अतः ये लोग ‘देवश्रव’ कहलाते हैं, देवताओं से ही अपने जीवन-मार्ग में प्रेरणा प्राप्त करने के कारण ये ‘देववात’ हैं। दानादि द्वारा औरों का भरण करनेवाले ये ‘भरतौ’ हैं।
Essence
भावार्थ — हमारे घर में प्रभु-पूजन इस रूप में चले कि यह घर ही प्रभु का लगे। हम प्रभु के कृपापात्र हों, जिससे यह घर उन्नत हो तथा इसकी सम्पत्ति बढ़े।
Subject
घर = प्रभु कीर्तन का केन्द्र