Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Yajurveda Adhyay 29 / Mantra 39

60 Mantra
29/39
Devata- वीरा देवताः Rishi- भारद्वाज ऋषिः Chhand- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
धन्व॑ना॒ गा धन्व॑ना॒जिं ज॑येम॒ धन्व॑ना ती॒व्राः स॒मदो॑ जयेम।धनुः॒ शत्रो॑रपका॒मं कृ॑णोति॒ धन्व॑ना॒ सर्वाः॑ प्र॒दिशो॑ जयेम॥३९॥

धन्व॑ना। गाः। धन्व॑ना। आ॒जिम्। ज॒ये॒म॒। धन्व॑ना। ती॒व्राः। स॒मद॒ इति॑ स॒ऽमदः॑। ज॒ये॒म॒। धनुः। शत्रोः॑। अ॒प॒का॒ममित्य॑पऽका॒मम्। कृ॒णो॒ति॒। धन्व॑ना। सर्वाः॑। प्र॒दिश॒ इति॑ प्र॒ऽदिशः॑। ज॒ये॒म॒ ॥३९ ॥

Mantra without Swara
धन्वना गा धन्वनाजिञ्जयेम धन्वना तीव्राः समदो जयेम । धनुः शत्रोरपकामङ्कृणोति धन्वना सर्वाः प्रदिशो जयेम ॥

धन्वना। गाः। धन्वना। आजिम्। जयेम। धन्वना। तीव्राः। समद इति सऽमदः। जयेम। धनुः। शत्रोः। अपकाममित्यपऽकामम्। कृणोति। धन्वना। सर्वाः। प्रदिश इति प्रऽदिशः। जयेम॥३९॥

Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. (धन्वना) = धनुष से (गा) = गौवों को जयेम जीतें। (धन्वना) = धनुष से (आजि) = युद्ध को जयेम जीतें | (धन्वना) = धनुष से (तीव्रा:) = उग्र व पटु बने हुए हम (समद:) = संग्रामों को (जयेम) = जीत जाएँ। (धनुः) = धनुष् (शत्रोः) = शत्रु की (कामम्) = इच्छा को (अपकृणोति) = दूर करता है, (धन्वना) = इस धनुष से (सर्वाः प्रदिशः) = सब प्रकृष्ट दिशाओं को जयेम जीत जाएँ। २. उपनिषदों में 'प्रणवो धनु:' इन शब्दों में (प्रणव) = ओंकार को धनुष् कहा है। योग में प्रणव के जप व अर्थभावन पर बल दिया है। इसके उच्चारण व अर्थभावन से हम इन्द्रियों [गा :] को जीतते है। इसी के बल से हम वासना संग्राम [आजि ] में विजयी होते है। इसके उच्चारण से शक्तिशाली बने हुए हम [तीव्रम्] सब संग्रामों को अथवा मदयुक्त प्रबल शत्रुओं को [समदः] पराजित करते हैं । ३. यह धनुष् ही- प्रणव का ध्यानपूर्वक जप ही हमपर कामाग्नि का आक्रमण नहीं होने देता। हम इस प्रणवरूप धनुष से सब दिशाओं में उन्नित कर पाते हैं।
Essence
भावार्थ- हम प्रणवरूप धनुष के महत्त्व को समझें और अर्थभावनपूर्वक 'ओम्' का जप करते हुए सच्चे धानुष्क [धनुर्धारी] बनें।
Subject
धनुष् [प्रणवरूप धनुष ]