Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Yajurveda Adhyay 28 / Mantra 7

46 Mantra
28/7
Devata- अश्विनौ देवते Rishi- बृहदुक्थो गोतम ऋषिः Chhand- जगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
होता॑ यक्ष॒द् दैव्या॒ होता॑रा भि॒षजा॒ सखा॑या ह॒विषेन्द्रं॑ भिषज्यतः।क॒वी दे॒वौ प्रचे॑तसा॒विन्द्रा॑य धत्तऽ इन्द्रि॒यं वी॒तामाज्य॑स्य॒ होत॒र्यज॑॥७॥

होता॑। य॒क्ष॒त्। दैव्या॑। होता॑रा। भि॒षजा॑। सखा॑या। ह॒विषा॑। इन्द्र॑म्। भि॒ष॒ज्य॒तः॒। क॒वीऽइति॑ क॒वी। दे॒वौ। प्रचे॑तसा॒विति॒ प्रऽचे॑तसौ। इन्द्रा॑य। ध॒त्तः॒। इ॒न्द्रि॒यम्। वी॒ताम्। आज्य॑स्य। होतः॑। यज॑ ॥७ ॥

Mantra without Swara
होता यक्षद्दैव्या होतारा भिषजा सखाया हविषेन्द्रम्भिषज्यतः । कवी देवौ प्रचेतसाविन्द्राय धत्तऽइन्द्रियँवीतामाज्यस्य होतर्यज ॥

होता। यक्षत्। दैव्या। होतारा। भिषजा। सखाया। हविषा। इन्द्रम्। भिषज्यतः। कवीऽइति कवी। देवौ। प्रचेतसाविति प्रऽचेतसौ। इन्द्राय। धत्तः। इन्द्रियम्। वीताम्। आज्यस्य। होतः। यज॥७॥

Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. (होता) = दानपूर्वक अदन करनेवाला दैव्या होतारा प्राणापानों को [ऐ० २।४] (यक्षत्) = अपने साथ संगत करता है। ये प्राणापान इसके (भिषजा) = वैद्य होते हैं, इसके रोगों को दूर करके (सखाया) = इसके मित्र बनते हैं अथवा ये प्राणापान परस्पर स्नेहवाले होते हैं। दोनों एक-दूसरे से सम्बद्ध होकर कार्य करते हैं। २. ये प्राणापान (हविषा) = अग्निहोत्र के साथ - अग्निहोत्र में आहुत किये गये हव्य पदार्थों को श्वास द्वारा सूक्ष्मरूप में अपने अन्दर लेने के द्वारा (इन्द्रम्) = जीव को (भिषज्यतः) = नीरोग करते हैं। ३. (कवी) = ये नीरोगता के द्वारा जीव को क्रान्तदर्शी बनाते हैं देवौ दिव्य गुणोंवाला करते हैं, (प्रचेतसौ) = प्रकृष्ट ज्ञानवाला बनाते हैं । (इन्द्राय) = जितेन्द्रिय पुरुष के लिए ये प्राणापान (इन्द्रियम्) = वीर्य को (धत्त) = धारण करते हैं। इस प्रकार ये प्राणापान इस जीवात्मा के लिए (आज्यस्य) = रेतस् का (वीताम्) = पान करें, इसकी शक्ति को शरीर में ही सुरक्षित करनेवाले हों। ४. होता हे दानपूर्वक अदन करनेवाले ! तू यज इन प्राणापानों को अपने साथ संगत कर अथवा दान देनेवाला बन और प्रभु को अपने साथ संगत कर ।
Essence
भावार्थ- प्राणापान साधक को नीरोग करते हैं। ये उसे क्रान्तदर्शी, दिव्य गुणोंवाला और ज्ञानी बनाते हैं। प्राणापान हमारे रेतस् की ऊर्ध्वगति का साधन हों।
Subject
प्राणापान [ दैव्या होतारा ]