Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Yajurveda Adhyay 28 / Mantra 41

46 Mantra
28/41
Devata- इन्द्रो देवता Rishi- सरस्वत्यृषिः Chhand- भुरिग् जगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
दे॒वीस्ति॒स्रस्ति॒स्रो दे॒वीर्व॑यो॒धसं॒ पति॒मिन्द्र॑मवर्धयन्।जग॑त्या॒ छन्द॑सेन्द्रि॒यꣳ शूष॒मिन्द्रे॒ वयो॒ द॒ध॑द् वसु॒वने॑ वसु॒धेय॑स्य व्यन्तु॒ यज॑॥४१॥

दे॒वीः। ति॒स्रः। ति॒स्रः। दे॒वीः। व॒यो॒धस॒मिति॑ वयः॒ऽधस॑म्। पति॑म्। इन्द्र॑म्। अ॒व॒र्ध॒य॒न्। जग॑त्या। छन्द॑सा। इ॒न्द्रि॒यम्। शूष॑म्। इन्द्रे॑। वयः॑। दध॑त्। व॒सु॒वन॒ इति॑ वसु॒ऽवने॑। व॒सु॒धेय॒स्येति॑ वसु॒ऽधेय॑स्य। व्य॒न्तु॒। यज॑ ॥४१ ॥

Mantra without Swara
देवीस्तिस्रस्तिस्रो देवीर्वयोधसम्पतिमिन्द्रमवर्धयन् । जगत्या च्छन्दसेन्द्रियँ शूषमिन्द्रे वयो दधद्वसुवने वसुधेयस्य व्यन्तु यज ॥

देवीः। तिस्रः। तिस्रः। देवीः। वयोधसमिति वयःऽधसम्। पतिम्। इन्द्रम्। अवर्धयन्। जगत्या। छन्दसा। इन्द्रियम्। शूषम्। इन्द्रे। वयः। दधत्। वसुवन इति वसुऽवने। वसुधेयस्येति वसुऽधेयस्य। व्यन्तु। यज॥४१॥

Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. (देवी: तिस्त्र:) = दिव्य गुणोंवाली तीनों 'भारती, सरस्वती, इडा' (तिस्रः) = तीनों ही (देवी:) = जीवन को प्रकाशमय बनानेवाली हैं। भारती मस्तिष्क को उज्ज्वल करती है, तो सरस्वती वाणी को दीप्त करती है और (इडा) = [= श्रद्धा] हृदय को जगमगा देती हैं। २. ये सब (पतिम्) = इन देवियों की अपने जीवन में रक्षा करनेवाले (इन्द्रम्) = जितेन्द्रिय पुरुष को (अवर्द्धयन्) = बढ़ाती हैं । ३. (जगत्या छन्दसा) = गतिशीलता की प्रबल भावना के साथ अथवा जगती के हित की भावना से [जगतं छन्दः] (इन्द्रियम्) = इन्द्रियों के सामर्थ्य को (शूषम्) = शत्रुओं के शोषक बल को तथा (वयः) = उत्कृष्ट जीवन को (इन्द्रे) = जितेन्द्रिय पुरुष में (दधत्) = [ दधत्यौ] धारण करती हुई (वसुवने) = धन के सेवन में (वसुधेयस्य) = धन के आधारभूत प्रभु का विस्मरण न होने दें। ५. हे जीव! तू (यज) = यज्ञशील बनकर उस प्रभु से अपना मेल बना ।
Essence
भावार्थ- हमारे जीवन में भारती, सरस्वती व इडा' एक विशेष दीप्ति को उत्पन्न करनेवाली हैं। ये हमें शत्रुओं के शोषक बल को प्राप्त कराएँ ।
Subject
जगती छन्द