Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Yajurveda Adhyay 28 / Mantra 11

46 Mantra
28/11
Devata- इन्द्रो देवता Rishi- प्रजापतिर्ऋषिः Chhand- निचृच्छक्वरी Swara- धैवतः
Mantra with Swara
होता॑ यक्ष॒दिन्द्र॒ स्वाहाज्य॑स्य॒ स्वाहा॒ मेद॑सः॒ स्वाहा॑ स्तो॒काना॒ स्वाहा॒ स्वाहा॑कृतीना॒ स्वाहा॑ ह॒व्यसू॑क्तीनाम्। स्वाहा॑ दे॒वाऽ आ॑ज्य॒पा जु॑षा॒णाऽ इन्द्र॒ऽ आज्य॑स्य॒ व्यन्तु॒ होत॒र्यज॑॥११॥

होता॑। य॒क्ष॒त्। इन्द्र॑म्। स्वाहा॑। आज्य॑स्य। स्वाहा॑। मेद॑सः। स्वाहा॑। स्तो॒काना॑म्। स्वाहा॑। स्वाहा॑कृतीना॒मिति॒ स्वाहा॑ऽकृतीनाम्। स्वाहा॑। ह॒व्यसू॑क्तीना॒मिति॑ ह॒व्यऽसू॑क्तीनाम्। स्वाहा॑। दे॒वाः। आ॒ज्य॒पा इत्या॑ज्य॒ऽपाः। जु॒षा॒णाः। इन्द्रः॑। आज्य॑स्य। व्यन्तु॑। होतः॑। यज॑ ॥११ ॥

Mantra without Swara
होता यक्षदिन्द्रँ स्वाहाज्यस्य स्वाहा मेदसः स्वाहा स्तोकानाँ स्वाहा स्वाहाकृतीनाँ स्वाहा हव्यसूक्तीनाम् । स्वाहा देवाऽआज्यपा जुषाणाऽइन्द्रऽआज्यस्य व्यन्तु होतर्यज ॥

होता। यक्षत्। इन्द्रम्। स्वाहा। आज्यस्य। स्वाहा। मेदसः। स्वाहा। स्तोकानाम्। स्वाहा। स्वाहाकृतीनामिति स्वाहाऽकृतीनाम्। स्वाहा। हव्यसूक्तीनामिति हव्यऽसूक्तीनाम्। स्वाहा। देवाः। आज्यपा इत्याज्यऽपाः। जुषाणाः। इन्द्रः। आज्यस्य। व्यन्तु। होतः। यज॥११॥

Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. (होता) = दानपूर्वक अदन करनेवाला (इन्द्रम्) = उस परमैश्वर्यशाली प्रभु को (यक्षत्) = अपने साथ संगत करे। २. इस प्रभु से मेल करनेवाले के जीवन में (स्वाहा) = [ स्व = हा] स्वार्थ त्याग करनेवाले (देवा:) = देव, अर्थात् प्राणादि पाँच (मरुत्) = जो (आज्यपाः) = शरीर में शक्ति का पान करनेवाले हैं। (जुषाणा:) = ये आत्मा का प्रीतिपूर्वक सेवन करनेवाले हैं, इनके साथ (इन्द्रः) = स्वयं जीवात्मा आज्यस्य शक्ति का व्यन्तु पान करे, इसलिए हे (होतः) = दानपूर्वक अदन करनेवाले ! तू (यज) = प्रभु से मेल कर । ३. ये सब देव आज्यस्य घृत का स्वाहा - स्वार्थत्याग की भावना के साथ व्यन्तु पान करें। मेदसः स्वाहा- औषध के गुणोंवाले [medicinal properties] या शरीर को कुछ स्थूल करनेवाले पदार्थों को स्वाहा स्वार्थत्याग के साथ व्यन्तु = पान करें, अर्थात् सारे घृत व मेदस् को स्वयं ही न खालें, अपितु त्याग करके बचे हुए को खानेवाले बनें। ४. (स्तोकानाम्) = सोम के कणों का (स्वाहा) = स्व में अपने में आहुति देते हुए पान करें। इन वीर्यकणों को नष्ट न होने दें। (स्वाहाकृतीनाम्) = [प्राणा यै स्वाहाकृतयः । - कौ० १०।५] प्राणों का स्वाहा स्व में आहुति देते हुए (व्यन्तु) = पान करें अथवा अपने में प्राणाशक्ति का विकास करें [वी प्रजनन]। (हव्यसूक्तीनाम्) = प्रभु को पुकारने के लिए मधुर वचनों का (स्वाहा) = अपने में आहुति देते हुए पान करें, अर्थात् वीर्यकणों को, प्राणशक्ति को तथा प्रभु को पुकारने के पवित्र पदों को अपने में धारण करें।
Essence
भावार्थ- होता प्रभु के साथ अपना मेल करें। घृत आदि पदार्थों का त्यागभावना से उपभोग करें। अपने में वीर्यकणों को, प्राणाशक्ति को तथा मधुर प्रार्थना व शक्तियों को आहुत करे, अर्थात् इनको धारण करें।
Subject
आज्य- मेदस्