Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Yajurveda Adhyay 27 / Mantra 39

44 Mantra
27/39
Devata- अग्निर्देवता Rishi- वामदेव ऋषिः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
कया॑ नश्चि॒त्रऽ आ भु॑वदू॒ती स॒दावृ॑धः॒ सखा॑।कया॒ शचि॑ष्ठया वृ॒ता॥३९॥

कया॑। नः॒। चि॒त्रः। आ। भु॒व॒त्। ऊ॒ती। स॒दावृ॑ध॒ इति॑ स॒दाऽवृधः॑। सखा॑। कया॑। शचि॑ष्ठया। वृ॒ता ॥३९ ॥

Mantra without Swara
कया नश्चित्रऽआ भुवदूती सदावृधः सखा । कया शचिष्ठया वृता ॥

कया। नः। चित्रः। आ। भुवत्। ऊती। सदावृध इति सदाऽवृधः। सखा। कया। शचिष्ठया। वृता॥३९॥

Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. गतमन्त्र के अनुसार उत्तम ज्ञानेन्द्रियों, कर्मेन्द्रियों व शरीर को प्राप्त करके यह 'वामदेव' - सुन्दर दिव्य गुणोंवाला बनता है और प्रभु-स्तवन करते हुए कहता है कि (चित्रः) = वह ज्ञान देनेवाले अद्भुत परमात्मा (कया ऊती) = किस कल्याणकारक रक्षण के द्वारा (नः) = हमारा (सदावृधः) = सदा वर्धन करनेवाला (सखा) = मित्र (आभुवत्) = होता है। वास्तव में ज्ञान देकर ही प्रभु हमारा कल्याण करते हैं, प्रभु द्वारा सतत चलनेवाला रक्षण हमारे लिए कल्याणकर होता है, इस रक्षण के द्वारा प्रभु हमारा वर्धन करते हैं और हमारे सच्चे मित्र होते हैं। २. हमारे मित्र प्रभु (कया) = अत्यन्त आनन्दमय (शचिष्ठया) = अत्यन्त शक्तिप्रद (वृता) = आवर्तन से हमारा सदा वर्धन करनेवाले होते हैं। 'दिन रात' का एक आवर्तन [चक्र] चल रहा है, दिन में कार्य करने से शक्ति का क्षय होता है तो रात्रि हमारी टूट-फूट को ठीक-ठाक करके हमें फिर से तरोताजा कर देती है। इसी प्रकार शुक्ल व कृणपक्षों का आवर्तन है। फिर वर्ष में मासों व ऋतुओं का आवर्तन है। ये सब आवर्तन हमारे स्वास्थ्य के लिए आवश्यक होते हुए हमारी शक्ति का वर्धन करते हैं।
Essence
भावार्थ- प्रभु का रक्षण व मास, ऋतु आदि के परिवर्तन से शक्ति का वर्धन- ये दोनों हमारे लिए कल्याणकर हैं।
Subject
सदावृधः सखा