Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Yajurveda Adhyay 27 / Mantra 10

44 Mantra
27/10
Devata- सूर्यो देवता Rishi- अग्निर्ऋषिः Chhand- विराडनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
उद्व॒यन्तम॑स॒स्परि॒ स्वः पश्य॑न्त॒ऽ उत्त॑रम्।दे॒वं दे॑व॒त्रा सूर्य॒मग॑न्म॒ ज्योति॑रुत्त॒मम्॥१०॥

उत्। व॒यम्। तम॑सः। परि॑। स्व᳖रिति॒ स्वः᳖। पश्य॑न्तः। उत्त॑र॒मित्यु॑त्ऽत॑रम्। दे॒वम्। दे॒व॒त्रेति॑ देव॒ऽत्रा। सूर्य॑म्। अग॑न्म। ज्योतिः॑। उ॒त्त॒ममित्यु॑त्ऽत॒मम् ॥१० ॥

Mantra without Swara
उद्वयन्तमसस्परि स्वः पश्यन्तऽउत्तरम् । देवन्देवत्रा सूर्यमगन्म ज्योतिरुत्तमम् ॥

उत्। वयम्। तमसः। परि। स्वरिति स्वः। पश्यन्तः। उत्तरमित्युत्ऽतरम्। देवम्। देवत्रेति देवऽत्रा। सूर्यम्। अगन्म। ज्योतिः। उत्तममित्युत्ऽतमम्॥१०॥

Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. गतमन्त्र के अनुसार सदा डरते न रहकर (वयम्) = हम (उत् तमसः परि) = उत्कृष्ट प्रकृति के बन्धन को छोड़कर, प्रकृति से ऊपर उठकर आगे बढ़ें। प्रकृति को पूर्णतया छोड़ने का देहवान् के लिए सम्भव नहीं, परन्तु इसमें उलझना भी सर्वथा हेय है। 'प्रकृति निकृष्ट हो' यह बात नहीं, भौतिक शरीर के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है, परन्तु इससे ऊपर उठना ही ठीक है । २. इससे ऊपर उठकर (उत्तरम् स्वः) = तुलना में अधिक उत्कृष्ट प्रकाशमय जीव को, अर्थात् आत्मस्वरूप को (पश्यन्तः) = देखते हुए आगे बढ़ें। प्रकृति उत्कृष्ट है, परन्तु जीव उत्कृष्टतर है। प्रकृति जड़ है, जीव पूर्ण चैतन्य न होते हुए भी चैतन्य कर्त्ता तो है ही। ३. यह आत्मदर्शी पुरुष कहता है कि हम (देवत्रा देवम्) = देवों में भी देव, देवों को भी बल प्राप्त करानेवाले (उत्तमं ज्योतिः) = सर्वोत्तम ज्योति परमात्मा को जो (सूर्यम्) = सूर्य की तरह देदीप्यमान है, (अगन्म) = प्राप्त हों। ४. मन्त्र में 'उत्, उत्तर व उत्तम' शब्द प्रकृति, जीव व परमात्मा का संकेत कर रहे हैं। प्रकृति उत्कृष्ट है, जीव उत्कृष्टतर है और परमात्मा उत्कृष्टतम । प्रकृति 'सत्' है जीव 'सत् + चित्' है और परमात्मा 'सत्+चित्+आनन्द' है।
Essence
भावार्थ- हम उत्कृष्ट प्रकृति का उत्तम प्रयोग करते हुए इससे ऊपर उठें, अपने पहुँचने के प्रकाशमयरूप को देखते हुए ज्योतियों में सर्वोत्तम ज्योति परमात्मा के समीप लिए यत्नशील हों। वही हमारा लक्ष्य हो ।
Subject
उत्+उत्तर+उत्तम