Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Yajurveda Adhyay 26 / Mantra 6

26 Mantra
26/6
Devata- वैश्वनरो देवता Rishi- प्रादुराक्षिर्ऋषिः Chhand- जगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
ऋ॒तावा॑नं वैश्वान॒रमृ॒तस्य॒ ज्योति॑ष॒स्पति॑म्। अज॑स्रं घ॒र्ममी॑महे। उ॒प॒या॒मगृ॑हीतोऽसि वैश्वान॒राय॑ त्वै॒ष ते॒ योनि॑र्वैश्वान॒राय॑ त्वा॥६॥

ऋ॒तावा॑नम्। ऋ॒तवा॑ना॒मित्यृ॒तऽवा॑नम्। वै॒श्वा॒न॒रम्। ऋ॒तस्य॑। ज्योति॑षः। पति॑म्। अज॑स्रम्। घ॒र्मम्। ई॒म॒हे॒। उ॒प॒या॒मगृ॑हीत॒ इत्यु॑पया॒मऽगृ॑हीतः। अ॒सि॒। वै॒श्वा॒न॒राय॑। त्वा॒। ए॒षः। ते॒। योनिः॑। वै॒श्वा॒न॒राय॑। त्वा॒ ॥६ ॥

Mantra without Swara
ऋतावानँवैश्वानरमृतस्य ज्योतिषस्पतिम् । अजस्रन्घर्ममीमहे । उपयामगृहीतोसि वैश्वानराय त्वैष ते योनिर्वैश्वानराय त्वा ॥

ऋतावानम्। ऋतवानामित्यृतऽवानम्। वैश्वानरम्। ऋतस्य। ज्योतिषः। पतिम्। अजस्रम्। घर्मम्। ईमहे। उपयामगृहीत इत्युपयामऽगृहीतः। असि। वैश्वानराय। त्वा। एषः। ते। योनिः। वैश्वानराय। त्वा॥६॥

Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. उल्लिखित साधनों को कार्यान्वित करता हुआ रम्याक्षि जिस दिन प्रभु का दर्शन करता है उस दिन 'प्रादुराक्षि' [प्रादुर्भूत ज्ञानवाला] बन जाता है और कहता है कि हम (ईमहे) = उस प्रभु से याचना करते हैं जो [क] (ऋतावानम्) = सत्य व यज्ञवाला है [ख] (वैश्वारनम्)[विश्वनरहितम् ] = सब मनुष्यों का हित करनेवाला है, [ग] (ऋतस्य ज्योतिषस्पतिम्) = सत्य, अविनाशी ज्योति, अर्थात् तेज का पालक है- तेज का अधिष्ठान है, [घ] (अजस्रम्) = [न जरयति नश्यति] अनुपक्षीण व अहिंसित है, [ङ] (घर्मम्) = सब मलों का क्षरण करनेवाला तथा दीप्त है [घृ क्षरणदीप्त्योः] । २. यह प्रादुराक्षि प्रभु से कहता है कि (उपयामगृहीतः असि) = हे प्रभो! आप उपासना द्वारा धारण किये गये यम-नियमों से गृहीत होते हो। मैं (त्वा) = तुझे वेद को (वैश्वानराय) = विश्वनरों का हित करनेवाले प्रभु के लिए स्वीकार करता हूँ। (एषः) = ये प्रभु (ते) = तेरा (योनिः) = उत्पत्तिस्थान है, अतः मैं (त्वा) = तुझे (वैश्वानराय) = इस विश्वनरों का हित करनेवाले के लिए स्वीकारता हूँ- मेरा यह वेदाध्ययन प्रभु-प्राप्ति के लिए ही होता है।
Essence
भावार्थ- हम वैश्वानर प्रभु का आराधन करें। वे यम-नियमों से गृहीत होते है। वेदज्ञान प्रभु प्राप्ति का साधन बनता है।
Subject
वैश्वानर प्रभु का आराधन