Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Yajurveda Adhyay 23 / Mantra 42

65 Mantra
23/42
Devata- अध्यापको देवता Rishi- प्रजापतिर्ऋषिः Chhand- भुरिगुष्णिक् Swara- ऋषभः
Mantra with Swara
दैव्या॑ऽअध्व॒र्यव॒स्त्वाच्छ्य॑न्तु॒ वि च॑ शासतु।गात्रा॑णि पर्व॒शस्ते॒ सिमाः॑ कृण्वन्तु॒ शम्य॑न्तीः॥४२॥

दैव्याः॑। अ॒ध्व॒र्यवः॑। त्वा॒। आ। छ्य॒न्तु॒। वि। च॒। शा॒स॒तु॒। गात्रा॑णि। प॒र्व॒श इति॑ पर्व॒ऽशः। ते। सिमाः॑। कृ॒ण्व॒न्तु॒। शम्य॑न्तीः ॥४२ ॥

Mantra without Swara
दैव्याऽअध्वर्यवस्त्वाच्छ्यन्तु वि च आसतु । गात्राणि पर्वशस्ते सिमाः कृण्वन्तु शम्यन्तीः॥

दैव्याः। अध्वर्यवः। त्वा। आ। छ्यन्तु। वि। च। शासतु। गात्राणि। पर्वश इति पर्वऽशः। ते। सिमाः। कृण्वन्तु। शम्यन्तीः॥४२॥

Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. (दैव्याः) = [देवस्य इमे] उस प्रभु के भक्त पुरुष (अध्वर्यव:) = [अध्वरं कामयमानाः] यज्ञ की कामनावाले (त्वा) = तुझे (आच्छ्यन्तु) = सब प्रकार की बुराइयों से विच्छिन्न करें। (च) = और (विशासतु) = विशिष्ट रूप से अनुशासन करें। जो 'दैव्य अध्वर्यु' पुरुष हैं वे अपने जीवन के उदाहरण से हमें सुप्रेरणा प्राप्त कराते हैं और हमें बुरे मार्ग से हटाकर उत्तम मार्ग पर लाते हैं। इस प्रकार वे हमें बुराइयों से विच्छिन्न करनेवाले हैं। उन व्यक्तियों का उपदेश हमारे लिए सचमुच बड़ा प्रभावजनक होता है और २. (शम्यन्ती:) = तेरे जीवन को शान्त बनाती हुई (सिमा:) = [सर्व : = Whole ] पूर्ण स्वस्थ तेरी शक्तियाँ (ते) = तेरे (गात्राणि) = अङ्गों को (पर्वशः) = एक-एक पर्व में कृण्वन्तु संस्कृत करनेवाली हों। शान्त व स्वस्थ पत्नी पति को भी उसी प्रकार स्वस्थ व शान्त बनानेवाली होती है।
Essence
भावार्थ- हमें 'दैव्य अध्वर्यु' = भक्त, यज्ञशील लोगों का सम्पर्क प्राप्त हो। हमारी आन्तरिक शक्तियाँ भी शान्त व स्वस्थ हों ।
Subject
अनुकूल सङ्ग [सत्सङ्ग ]