Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Yajurveda Adhyay 23 / Mantra 37

65 Mantra
23/37
Devata- स्त्रियो देवताः Rishi- प्रजापतिर्ऋषिः Chhand- अनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
र॒ज॒ता हरि॑णीः॒ सीसा॒ युजो॑ युज्यन्ते॒ कर्म॑भिः।अश्व॑स्य वा॒जिन॑स्त्व॒चि सिमाः॑ शम्यन्तु॒ शम्य॑न्तीः॥३७॥

र॒ज॒ताः। हरि॑णीः। सीसाः॑। युजः॑। यु॒ज्य॒न्ते॒। कर्म॑भिरिति॒ कर्म॑ऽभिः। अश्व॑स्य। वा॒जिनः॑। त्व॒चि। सिमाः॑। श॒म्य॒न्तु॒। शम्य॑न्तीः ॥३७ ॥

Mantra without Swara
रजता हरिणीः सीसा युजो युज्यन्ते कर्मभिः । अश्वस्य वाजिनस्त्वचि सिमाः शम्यन्तु शम्यन्तीः ॥

रजताः। हरिणीः। सीसाः। युजः। युज्यन्ते। कर्मभिरिति कर्मऽभिः। अश्वस्य। वाजिनः। त्वचि। सिमाः। शप्यन्तु। शम्यन्तीः॥३७॥

Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. प्रस्तुत मन्त्र में गृहिणियों का उल्लेख करते हुए कहते हैं कि (रजताः) = [अनुरक्तम्- द०] अनुरागवाली (हरिणी:) = अपने उत्तम व्यवहार व कार्यकुशलता से दुःखों का हरण करनेवाली अथवा मन को आकृष्ट करेनवाली, (सीसा:) = [षिञ् बन्धने] प्रेममय व्यवहार से घर में सबको परस्पर बाँधकर रखनेवाली, घर में लड़ाई-झगड़े न होने देनेवाली, (युजः) = सदा पति का साथ देनेवाली, उसके साथ मिलकर गृहस्थ के बोझ को उठानेवाली पत्नियाँ (कर्मभिः युज्यन्ते) = कर्मों से सदा सङ्गत रहती हैं। इनका जीवन कभी अकर्मण्यता का नहीं होता। २. (अश्वस्य) = कर्मों में व्याप्त रहनेवाले (वाजिनः) = शक्तिशाली पति के (त्वचि) = संवरण में, रक्षा में, जैसे शरीर को त्वचा ने सुरक्षित किया हुआ है उसी प्रकार पति ने घर को सुरक्षित रखना है (सिमा:), = [सर्वा: = Whole] पूर्ण स्वास्थ्य को प्राप्त हुई हुई (शम्यन्ती:) = शान्ति को प्राप्त होती हुई शम्यन्तु शान्ति देनेवाली हों। ३. प्रस्तुत मन्त्र में पत्नी के गुणों का उल्लेख इन शब्दों में किया है कि, [क] (रजता:) = वे अनुरागवाली हों। प्रेम के अभाव में गृहस्थभवन की नींव ही नहीं पड़ सकती, [ख] (हरिणीः) = वे अपने उत्तम व्यवहार से कष्टों का हरण करनेवाली हों। पत्नी का व्यवहार ही घर को स्वर्ग व नरक बना देता है, [ग] (सीसा:) = पत्नियाँ प्रेममय व्यवहार से घर में सबको बाँधनेवाली हों। वे भाइयों को परस्पर झगड़ने न दें, [घ] (युजः) = सदा पति के कर्मों में सहयोग देनेवाली हों, [ङ] (युज्यन्ते कर्मभिः) = कभी अकर्मण्य न हों, [च] (अश्वस्य वाजिनः त्वचि) = उन्हें कर्मशील शक्तिशाली पति का संरक्षण प्राप्त हो, [छ] (सिमा:) = वे पूर्ण स्वस्थ हों, विकलांग न हों, [ज] (शम्यन्ती) - शान्त स्वभाववाली हों।, [झ] (शम्यन्तु) = औरों को शान्ति प्राप्त करानेवाली हों ।
Essence
भावार्थ- गृहिणी उत्तम गुण-कर्म व स्वभाव से घर को स्वर्ग बनानेवाली होती हैं।
Subject
उत्तम गृहिणी