Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Yajurveda Adhyay 23 / Mantra 35

65 Mantra
23/35
Devata- प्रजा देवता Rishi- प्रजापतिर्ऋषिः Chhand- भुरिगुष्णिक् Swara- ऋषभः
Mantra with Swara
म॒हाना॑म्न्यो रे॒वत्यो॒ विश्वा॒ आशाः॑ प्र॒भूव॑रीः।मैघी॑र्वि॒द्युतो॒ वाचः॑ सू॒चीभिः॑ शम्यन्तु त्वा॥३५॥

म॒हाना॑म्न्य॒ इति॑ म॒हाऽना॑म्न्यः। रे॒वत्यः॑। विश्वाः॑। आशाः॑। प्र॒भूव॒रीरिति॑ प्र॒ऽभूव॑रीः। मैघीः॑। वि॒द्युत॒ इति॑ वि॒द्युऽतः॑। वाचः॑। सू॒चीभिः॑। श॒म्य॒न्तु॒। त्वा॒ ॥३५ ॥

Mantra without Swara
महानाम्न्यो रेवत्यो विश्वाऽआशाः प्रभूवरीः । मैघीर्विद्युतो वाचः सूचीभिः शम्यन्तु त्वा ॥

महानाम्न्य इति महाऽनाम्न्यः। रेवत्यः। विश्वाः। आशाः। प्रभूवरीरिति प्रऽभूवरीः। मैघीः। विद्युत इति विद्युऽतः। वाचः। सूचीभिः। शम्यन्तु। त्वा॥३५॥

Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. (महानाम्न्यः) = महानाम्नी नामवाली (वाचः) = ऋग्वाणियाँ (सूचीभि:) = अपने सूत्रात्मक उपदेशों से (त्वा) = तुझे (शम्यन्तु) = शान्त करें। ये 'महानाम्नी' ऋचाएँ महान् प्रभु के नामों का स्मरण कराने के कारण 'महानाम्नी' कहलाती हैं। प्रभु नाम-स्मरण से मनुष्य में ये शक्ति उत्पन्न करती हैं, अतः 'शक्वर्यः' नामवाली भी हो जाती हैं। इनका उपदेश यही है कि 'उस महान् प्रभु के नाम का जप करो और उसके अर्थ की भावना करो'। जीवन की सच्ची पवित्रता व शान्ति इसी से प्राप्त होती है। २. (रेवत्यः) = रेवत नामवाली (वाचः) = रेवती वाणियाँ (सूचीभि:) = अपनी सूत्रात्मक सूचनाओं से (त्वा) = तुझे (शम्यन्तु) = शान्त करें। इन वाणियों से ही हम वास्तविक ऐश्वर्य को प्राप्त करने का बोध लेते हैं । ३. (विश्वाः आशाः) = सब दिशाओं को (प्रभूवरीः) = शक्तिशाली बनानेवाली (वाच:) = वाणियाँ (सूचीभि:) = अपनी सूत्रात्मक सूचनाओं से तुझे शान्त करें। इन वाणियों का उपदेश है कि तुम अपनी सब दिशाओं को शक्तिशाली बनाओ, अर्थात् सब दिशाओं में उन्नति करनेवाले बनो। तुम्हारा शरीर-मन-मस्तिष्क सभी प्रभावशाली हों। ४. (मैघी:) = मेघों के समान ज्ञानजल का वर्षण करनेवाली ये (वाच:) = वाणियाँ तुझे अपनी सूचनाओं से शान्त करें। इनकी सूचना है कि जैसे मेघ जल की वर्षा से औरों के सन्तापों को हरता है उसी प्रकार तू ज्ञानजल के वर्षण से औरों को सुखी करनेवाला हो । ५. (विद्युतः) = ये विशेष द्युतिवाली (वाच:) = वाणियाँ, विद्युत् के समान चमकती हुई सूचना दे रही हैं कि तू विशिष्ट ज्ञान से चमकनेवाला बन। यह सूचना तेरे जीवन का अङ्ग बने और तुझे शान्ति प्राप्त कराए।
Essence
भावार्थ-वेद की विविध वाणियाँ यह उपदेश दे रही हैं कि [क] तुम उस महान् प्रभु के नाम का स्मरण करो। [ख] वास्तविक ऐश्वर्य का अर्जन करो। [ग] सब दिशाओं में उन्नति करो। [घ] मेघों की भाँति सन्ताप हरनेवाले बनो और [ङ] बिजली की भाँति चमकते हुए अन्धेरे में औरों को रास्ता दिखानेवाले बनो।
Subject
विविध वाणियों के उपदेश