Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Yajurveda Adhyay 22 / Mantra 4

34 Mantra
22/4
Devata- विश्वेदेवा देवताः Rishi- प्रजापतिर्ऋषिः Chhand- जगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
स्व॒गा त्वा॑ दे॒वेभ्यः॑ प्र॒जाप॑तये॒ ब्रह्म॒न्नश्वं॑ भ॒न्त्स्यामि॑ दे॒वेभ्यः॑ प्र॒जाप॑तये॒ तेन॑ राध्यासम्। तं ब॑धान दे॒वेभ्यः॑ प्र॒जाप॑तये॒ तेन॑ राध्नुहि॥४॥

स्व॒गेति॑ स्व॒ऽगा। त्वा॒। दे॒वेभ्यः॑। प्र॒जाप॑तय॒ इति॑ प्र॒जाऽप॑तये। ब्रह्म॑न्। अश्व॑म्। भ॒न्त्स्यामि॑। दे॒वेभ्यः॑। प्र॒जाप॑तय॒ इति॑ प्र॒जाऽप॑तये। तेन॑। रा॒ध्या॒स॒म्। तम्। ब॒धा॒न॒। दे॒वेभ्यः॑। प्र॒जाप॑तय॒ इति॑ प्र॒जाऽप॑तये। तेन॑। रा॒ध्नु॒हि॒ ॥४ ॥

Mantra without Swara
स्वगा त्वा देवेभ्यः प्रजापतये ब्रह्मन्नश्वम्भन्त्स्यामि देवेभ्यः प्रजापतये तेन राध्यासम् । तम्बधान देवेभ्यः प्रजापतये तेन राध्नुहि ॥

स्वगेति स्वऽगा। त्वा। देवेभ्यः। प्रजापतय इति प्रजाऽपतये। ब्रह्मन्। अश्वम्। भन्त्स्यामि। देवेभ्यः। प्रजापतय इति प्रजाऽपतये। तेन। राध्यासम्। तम्। बधान। देवेभ्यः। प्रजापतय इति प्रजाऽपतये। तेन। राध्नुहि॥४॥

Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. हे (ब्रह्मन्) = [बृहि वृद्धौ ] अत्यन्त बढ़े हुए [वर्धमानं स्वे दमे] (अश्वम्) = [अश्नुते] सर्वव्यापक (त्वा) = आपको (देवेभ्यः) = दिव्य गुणों की प्राप्ति के लिए तथा (प्रजापतये) = प्रजाओं का पति बनने के लिए (भन्त्स्यामि) = बाँधूंगा, अर्थात् ध्यान के द्वारा अपने हृदय में आपका धारण करूँगा। २. (तेन) = उस अश्व-बन्धन के द्वारा मैं (देवेभ्यः) = दिव्य गुणों की प्राप्ति के लिए तथा (प्रजापतये) = प्रजाओं की रक्षा के लिए (राध्यासम्) = सिद्धि को प्राप्त करूँ, समर्थ होऊँ, अर्थात् मैं प्रतिदिन हृदयदेश में प्रभु का बन्धन करता हुआ दिव्य गुणों को व प्रजापतित्व को प्राप्त करनेवाला बनूँ। ३. (तं बधान) = सर्वव्यापक प्रभु को तू बाँधनेवाला बन और (तेन) = उससे (देवेभ्यः) = दिव्य गुणों की प्राप्ति के लिए तथा (प्रजापतये) = प्रजा का पति बनने के लिए (राध्नुहि) = सिद्ध हो, तू दिव्य गुणों को प्राप्त कर तथा प्रजा का रक्षक बन ।
Essence
भावार्थ- प्रभु स्मरण करनेवाला व्यक्ति दिव्य गुणों को प्राप्त करता है और प्रजा का रक्षक बनता है।
Subject
अश्व-बन्धन