Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Yajurveda Adhyay 20 / Mantra 78

90 Mantra
20/78
Devata- अग्निर्देवता Rishi- विदर्भिर्ऋषिः Chhand- जगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
यस्मि॒न्नश्वा॑सऽऋष॒भास॑ऽउ॒क्षणो॑ व॒शा मे॒षाऽअ॑वसृ॒ष्टास॒ऽआहु॑ताः।की॒ला॒ल॒पे सोम॑पृष्ठाय वे॒धसे॑ हृ॒दा म॒तिं ज॑नय॒ चारु॑म॒ग्नये॑॥७८॥

यस्मि॑न्। अश्वा॑सः। ऋ॒ष॒भासः॑। उ॒क्षणः॑। व॒शाः। मे॒षाः। अ॒व॒सृ॒ष्टास॒ इत्य॑वऽसृ॒ष्टासः॑। आहु॑ता॒ इत्याऽहु॑ताः। की॒ला॒ल॒प इति॑ कीलाल॒ऽपे। सोम॑पृष्ठा॒येति॒ सोम॑ऽपृष्ठाय। वे॒धसे॑। हृ॒दा। म॒तिम्। ज॒न॒य॒। चारु॑म्। अ॒ग्नये॑ ॥७८ ॥

Mantra without Swara
यस्मिन्नश्वासऽऋषभासऽउक्षणो वशा मेषाऽअवसृष्टासऽआहुताः । कीलालपे सोमपृष्ठाय वेधसे हृदा मतिञ्जनये चारुमग्नये ॥

यस्मिन्। अश्वासः। ऋषभासः। उक्षणः। वशाः। मेषाः। अवसृष्टास इत्यवऽसृष्टासः। आहुता इत्याऽहुताः। कीलालप इति कीलालऽपे। सोमपृष्ठायेति सोमऽपृष्ठाय। वेधसे। हृदा। मतिम्। जनय। चारुम्। अग्नये॥७८॥

Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. उस (अग्नये) = अग्नि के लिए (हृदा) = हृदय से, अर्थात् श्रद्धा से (चारुम्) = सुन्दर (मतिम्) = स्तोत्र को (जनय) = उत्पन्न कर, अर्थात् अग्निहोत्र करते हुए तू श्रद्धापूर्वक सुन्दर स्तवन करनेवाला बन। २. उस अग्नि के लिए (यस्मिन्) = जिसमें (अश्वासः) = [तरवी अश्वगन्धायां तुरगश्चिद्वाजिनो:] अश्वगान्धा नामक ओषधि (ऋषभासः) = [शृंगी तु, ऋषभो वृषः] काकड़ासिंगी नामक ओषधि (उक्षण:) = [One of the eight chief medicines आप्टे] सर्वोत्तम आठ ओषधियों में से एक, उक्षा नामक ओषधि (वशा) = [offering, कामिताहुति:- द०] एक अत्यन्त वाञ्छनीय औषध (मेषा:) = [Small cardmons आप्टे] छोटी इलायची-ये (अवसृष्टासः) = [to form, create] सम्यक्तया तैयार की जाती हैं और (आहुताः) = आहुत की जाती हैं। ये सब ओषधियाँ रोगनिवारक व रोगकृमियों की संहारक हैं। इनके विशिष्ट गुणों के कारण इनकी सामग्री के साथ आहुतियाँ दी जाती हैं। २. उस (कीलालपे) = [कीलालं = रुधिरं ] रुधिर की रक्षा करनेवाली अग्नि के लिए। यह अग्नि उत्तम ओषधियों के सूक्ष्म कणों से रुधिर को एकदम शुद्ध कर देती है। ३. (सोमपृष्ठाय) = सोम की आधारभूत अग्नि के लिए, अर्थात् शरीर में रुधिर आदि के शोधन के द्वारा यह अग्नि सोम [वीर्य] को सुरक्षित करती है। अथवा जिसमें सोमलता की आहुतियाँ दी जाती हैं [ सोमाहुतयो यस्य पृष्ठे हूयन्ते] उस (वेधसे) = [ विदधाति शुभं करोति, शुभमति:] बुद्धि को शुद्ध बनानेवाले अग्नि के लिए स्तोत्रों को कर।
Essence
भावार्थ- अग्निहोत्र से १. रोग दूर होते हैं । २. रुधिर शुद्ध होता है । ३. सोम की रक्षा होती है। ४. बुद्धि शुद्ध होती है।
Subject
अग्निहोत्र