Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Yajurveda Adhyay 20 / Mantra 57

90 Mantra
20/57
Devata- अश्विसरस्वतीन्द्रा देवताः Rishi- विदर्भिर्ऋषिः Chhand- अनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
इन्द्रा॒येन्दु॒ꣳ सर॑स्वती॒ नरा॒शꣳसे॑न न॒ग्नहु॑म्।अधा॑ताम॒श्विना॒ मधु॑ भेष॒जं भि॒षजा॑ सु॒ते॥५७॥

इन्द्रा॑य। इन्दु॑म्। सर॑स्वती। नरा॒शꣳसे॑न। न॒ग्नहु॑म्। अधा॑ताम्। अ॒श्विना॑। मधु॑। भे॒ष॒जम्। भि॒षजा॑। सु॒ते ॥५७ ॥

Mantra without Swara
इन्द्रायेन्दुँ सरस्वती नराशँसेन नग्नहुम् । अधातामश्विना मधु भेषजम्भिषजा सुते ॥

इन्द्राय। इन्दुम्। सरस्वती। नराशꣳसेन। नग्नहुम्। अधाताम्। अश्विना। मधु। भेषजम्। भिषजा। सुते॥५७॥

Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. (सरस्वती) = ज्ञान की अधिदेवता (इन्द्राय) = जितेन्द्रिय पुरुष के लिए इन्दुम् सोम को, [इन्द् to be powerful या इन्द् परमैश्वर्य] शक्ति व ज्ञानरूप परमैश्वर्य के कारणभूत इस सोम को धारण करती है। सोम को यहाँ इन्दु कहा गया है, चूँकि यह सोम शक्ति व परमैश्वर्य का कारण बनता है। मनुष्य जब ज्ञान प्राप्ति के मार्ग पर चलता है तब यह सोम ज्ञानाग्नि का ईंधन बनता है और ज्ञानाग्नि को दीप्त करता है। २. यह सरस्वती ही इस इन्द्र को (नराशंसेन) = [नरै आशंसनीयेन] मनुष्यों से चाहनेयोग्य इस यज्ञ से (नग्नहुम्) = [नग्नः सन् जुहोति ] अपनी आवश्यकताओं को कम करके आहुति देनेवाला दान देनेवाला बनाती है। ज्ञान से मनुष्य भौतिक वृत्तियों से ऊपर उठता हुआ खूब देने की वृत्तिवाला बनता है। ३.इस इन्द्र के लिए ही (भिषजा अश्विना) = रोगों के चिकित्सक प्राणापान (सुते) = शरीर में सोम का उत्पादन होने पर (मधु भेषजम्) = अत्यन्त माधुर्यमय औषध को (अधाताम्) = धारण करते हैं। अथवा इस (मधु) = शहदरूप औषध को धारण करते हैं, अर्थात् प्राणापान की शक्ति के साथ इस मधु का मात्रा में प्रयोग इनके लिए सर्वोत्तम औषध हो जाता है। शहद की सामान्यतः मात्रा गर्मियों में १८ ग्राम व सर्दियों में ३० ग्राम हो सकती है।
Essence
भावार्थ - १. ज्ञान का उपासक पुरुष सोम की रक्षा के द्वारा शक्तिसम्पन्न बनता है । २. यज्ञियवृत्ति को धारण कर, अपनी आवश्यकताएँ न बढ़ाकर दान देता है ३. प्राणापान इसके वैद्य बनते हैं, ४. मात्रा में किया गया मधु का प्रयोग इनके लिए सर्वोत्तम औषध बन जाता है।
Subject
मधु भेषजम्