Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Yajurveda Adhyay 20 / Mantra 27

90 Mantra
20/27
Devata- सोमो देवता Rishi- प्रजापतिर्ऋषिः Chhand- विराडनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
अ॒ꣳशुना॑ ते अ॒ꣳशुः पृ॑च्यतां॒ परु॑षा॒ परुः॑।ग॒न्धस्ते॒ सोम॑मवतु॒ मदा॑य॒ रसो॒ऽअच्यु॑तः॥२७॥

अ॒ꣳशुना॑। ते॒। अ॒ꣳशुः। पृ॒च्य॒ता॒म्। परु॑षा। परुः॑। ग॒न्धः। ते॒। सोम॑म्। अ॒व॒तु॒। मदा॑य। रसः॑। अच्युतः॑ ॥२७ ॥

Mantra without Swara
अँशुना तेऽअँशुः पृच्यताम्परुषा परुः । गन्धस्ते सोममवतु मदाय रसोऽअच्युतः ॥

अꣳशुना। ते। अꣳशुः। पृच्यताम्। परुषा। परुः। गन्धः। ते। सोमम्। अवतु। मदाय। रसः। अच्युतः॥२७॥

Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. गतमन्त्र में वर्णित पुण्यलोक के निवासियों के लिए ही कहते हैं कि (अंशुना) = ज्ञान की किरण के साथ (ते) = तेरी अंशु ज्ञान की किरण (पृच्यताम्) = संपृक्त हो, अर्थात् तेरा ज्ञान-प्राप्ति का तन्तु कभी विच्छिन्न न हो। ('हिरण्यमस्तृतम् भव') = तू अविच्छिन्न ज्ञानवाला बन, अर्थात् तेरा ज्ञान निरन्तर बढ़ता चले। २. शरीर में (परुषा) = जोड़ के साथ (परु:) = जोड़ (पृच्यताम्) = ठीक जुड़ा हो। अङ्गों का शरीर में सन्धान बिलकुल ठीक हो । जोड़ों के ढीले हो जाने पर जैसे एक गाड़ी पुराना छकड़ा-सा बन जाती है, उसी प्रकार तेरा यह शरीर - रथ जीर्णशीर्ण-सा न बन जाए। इसमें सब जोड़ ठीक से जुड़े हों। ३. 'तेरा ज्ञान अविच्छिन्न हो ' तथा 'तेरे शरीर के अङ्ग-प्रत्यङ्ग ठीक से सटे हुए हों' इन दोनों बातों के लिए ते-तेरा (गन्धः) = [सम्बन्धः] प्रभु के साथ सम्पर्क (सोमम्) = शरीर में सोमशक्ति को (अवतु) = सुरक्षित करे। सोम की रक्षा होने पर ही ज्ञान की अविच्छिन्नता व शरीर की दृढ़ता सम्भव है। ४. यह (अच्युतः) = न क्षरित हुआ (रसः) जीवन को रसमय बनानेवाला अथवा ओषधियों का सारभूत सोमरस तेरे उल्लास के लिए होता है। ओषधियों के सेवन से रसादि क्रम से उत्पन्न हुआ हुआ सोम जब प्रभु स्मरण के द्वारा शरीर में ही सुरक्षित किया जाता है तब यह एक अद्भुत मस्ती का कारण होता है। जीवन में इस सोम का पान [रक्षण] करनेवाला व्यक्ति उल्लास का अनुभव करता है।
Essence
भावार्थ- हमारा ज्ञान अविच्छिन्न हो, शरीर सुदृढ़ हो । प्रभु स्मरण के द्वारा हम अपने सोम की रक्षा करें, न क्षरित हुआ हुआ यह सोम हमारे जीवन में उल्लास देनेवाला हो ।
Subject
अंशुना अंशुः