Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Yajurveda Adhyay 20 / Mantra 23

90 Mantra
20/23
Devata- समिद्देवता Rishi- प्रजापतिर्ऋषिः Chhand- स्वराडतिशक्वरी Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
एधो॑ऽस्येधिषी॒महि॑ स॒मिद॑सि॒ तेजो॑ऽसि॒ तेजो॒ मयि॑ धेहि। स॒माव॑वर्ति पृथि॒वी समु॒षाः समु॒ सूर्यः॑। समु॒ विश्व॑मि॒दं जग॑त्। वै॒श्वा॒न॒रज्यो॑तिर्भूयासं वि॒भून् कामा॒न् व्यश्नवै॒ भूः स्वाहा॑॥२३॥

एधः॑। अ॒सि॒। ए॒धि॒षी॒महि॑। स॒मिदिति॑ स॒म्ऽइत्। अ॒सि॒। तेजः॑। अ॒सि॒। तेजः॑। मयि॑। धे॒हि॒। स॒माव॑व॒र्तीति॑ स॒म्ऽआव॑वर्ति। पृ॒थि॒वी। सम्। उ॒षाः। सम्। ऊँ॒ऽइत्यूँ॑। सूर्यः॑। सम्। ऊँ॒ऽइत्यूँ॑। विश्व॑म्। इ॒दम्। जग॑त्। वै॒श्वा॒न॒रज्यो॑ति॒रिति॑ वैश्वान॒रऽज्यो॑तिः। भू॒या॒स॒म्। वि॒भूनिति॑ वि॒ऽभून्। कामा॑न्। वि। अ॒श्न॒वै॒। भूः। स्वाहा॑ ॥२३ ॥

Mantra without Swara
एधोस्येधिषीमहि समिदसि तेजो सि तेजो मयि धेहि । समाववर्ति पृथिवी समुषाः समु सूर्यः । समु विश्वमिदञ्जगत् । वैश्वानरज्योतिर्भूयासँविभून्कामान्व्यश्नवै भूः स्वाहा ॥

एधः। असि। एधिषीमहि। समिदिति सम्ऽइत्। असि। तेजः। असि। तेजः। मयि। धेहि। समाववर्तीति सम्ऽआववर्ति। पृथिवी। सम्। उषाः। सम्। ऊँऽइत्यूँ। सूर्यः। सम्। ऊँऽइत्यूँ। विश्वम्। इदम्। जगत्। वैश्वानरज्योतिरिति वैश्वानरऽज्योतिः। भूयासम्। विभूनिति विऽभून्। कामान्। वि। अश्नवै। भूः। स्वाहा॥२३॥

Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. गतमन्त्र के अनुसार उस रसमय प्रभु से अपना सम्पर्क बनानेवाला व्यक्ति प्रभु से प्रार्थना करता है कि (एधः असि) = आप सदा से बढ़े हुए हैं। आप प्रत्येक गुण का निरतिशय रूप हैं। (एधिषीमहि) = आपके सम्पर्क से हम भी बढ़नेवाले बनें। २. (समित् असि) = आप सम्यक् दीप्त ज्ञानाग्निरूप हैं। आपकी कृपा से मेरी ज्ञानाग्नि भी दीप्त हो। ३. (तेजः असि) = आप तेजस्विता के पुञ्ज हैं। (तेजः मयि धेहि) = आप मुझमें तेजस्विता का आधान कीजिए । ४. इस 'वर्धन- ज्ञानाग्निदीपन व तेजस्विता' के लिए मैं उसी प्रकार अपने दैनिक कार्यक्रम का ठीक से आवर्तन करूँ जैसेकि (पृथिवी समाववर्ति) = पृथिवी सम्यक्तया आवृत्त हो रही है। (उ) = और (उषा:) = उषा (उ) = तथा (सूर्य:) = सूर्य भी (सम्) = नियमपूर्वक आवर्तन में चल रहा है। बहुत क्या? (इदं विश्वं जगत्) = यह सम्पूर्ण संसार (उ) = भी (सम्) = सम्यक् आवर्तन कर रहा है। इस संसार से प्रेरणा लेकर मैं भी सम्यक् आवर्तनवाला बनूँ। मेरी दिनचर्या बड़ी ठीक हो । ५. इस प्रकार प्राकृतिक जगत् के आवर्तन की भाँति अपने दैनिक कार्यक्रम का ठीक आवर्तन करता हुआ मैं (वैश्वानरज्योतिः) = सब मनुष्यों के सञ्चालक प्रभु की ज्योतिवाला बनूँ, प्रभु के तेज से तेजस्वी बनूँ। ६. (विभून्) = व्यापक (कामान्) = इच्छाओं को (व्यश्नवै) = प्राप्त करूँ। मेरी कमानाएँ उदारता को लिये हुए हों। संकुचित, स्वार्थमयी इच्छाओंवाला मैं न होऊँ। ७. इस प्रकार उत्तम जीवनवाला बनकर (भूः) = मैं प्राणशक्ति का पुञ्ज बनूँ और स्वाहा उस आत्मा के प्रति अपना अर्पण करनेवाला बनूँ।
Essence
भावार्थ- मैं 'वर्धन- ज्ञानाग्निदीपन व तेजस्वितावाला' होऊँ । सूर्य-चन्द्र आदि की भाँति व्यवस्थित क्रियाओंवाला बनूँ। प्रभु के तेजोऽश को प्राप्त करूँ। उदारमना बनूँ । प्राणशक्तिसम्पन्न होकर समर्पण की वृत्तिवाला होऊँ ।
Subject
उदार इच्छाएँ