Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Yajurveda Adhyay 20 / Mantra 16

90 Mantra
20/16
Devata- सूर्य्यो देवता Rishi- प्रजापतिर्ऋषिः Chhand- निचृदनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
यदि॒ जाग्र॒द् यदि॒ स्वप्न॒ऽएना॑सि चकृ॒मा व॒यम्। सूर्यो॑ मा॒ तस्मा॒देन॑सो॒ विश्वा॑न्मुञ्च॒त्वꣳह॑सः॥१६॥

यदि॑। जाग्र॑त्। यदि॑। स्वप्ने॑। एना॑सि। च॒कृ॒म। व॒यम्। सूर्यः॑। मा॒। तस्मा॑त्। एन॑सः। विश्वा॑त्। मु॒ञ्च॒तु॒। अꣳह॑सः ॥१६ ॥

Mantra without Swara
यदि जाग्रद्यदि स्वप्नऽएनाँसि चकृमा वयम् । सूर्यो मा तस्मादेनसो विश्वान्मुञ्चत्वँहसः ॥

यदि। जाग्रत्। यदि। स्वप्ने। एनासि। चकृम। वयम्। सूर्यः। मा। तस्मात्। एनसः। विश्वात्। मुञ्चतु। अꣳहसः॥१६॥

Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. (यदि जाग्रत्) = यदि जागते हुए अथवा (यदि स्वप्ने) = यदि सोते हुए (वयम्) = हम (एनांसि) = पापों को चकृम कर बैठते हैं तो २. (सूर्य:) = सूर्य (मा) = मुझे (तस्मात्) = उस (विश्वात्) = सब (एनस:) = पाप से (मुञ्चतु) = मुक्त करे और उन पापों से होनेवाले (अंहसः) = कष्ट से भी मुक्त करे। ३. जाग्रत् अवस्था में प्रलोभनवश हम अपने व्यवहारों में शतशः गलतियाँ कर बैठते हैं। हम समझते हैं कि यह वस्तु न खानी चाहिए, परन्तु स्वादवश खा बैठते हैं। इसी प्रकार हम समझते हैं कि हमें यह शब्द नहीं बोलना चाहिए, परन्तु बोल बैठते हैं। यदि किसी प्रकार जाग्रत् अवस्था में हम अपने को वश में कर भी लें तो सो जाने पर हम उन्हीं वस्तुओं का स्वाद लेने लगते हैं और अपशब्दों को बोलने लगते हैं। अतः ४. सूर्य हमें इन जागते व सोते समय होनेवाले पापों से बचाए और उनके परिणामभूत कष्टों से भी बचाए । 'सूर्य' शब्द की भावना है 'सरति ' = चलता है। हमें भी दिनभर चलना है, थक नहीं जाना तभी तो हम इस अश्रान्त भाव से चलनेवाले सूर्य की भाँति चमकेंगे। निरन्तर क्रिया में लगे रहनेवाला व्यक्ति जाग्रत् व स्वप्न के पापों से बचा रहता है। जाग्रत् में उसे अवकाश नहीं होता, स्वप्न में उसे मोक्षरूपता-सी प्राप्त हो जाती है। इस प्रकार यह सूर्य - 'सरण' की, निरन्तर चलने की प्रेरणा देकर हमें पापों से बचाता है।
Essence
भावार्थ- सूर्य से सरण व गति की प्रेरणा लेकर मैं अपने जाग्रत् व स्वप्न- दोनों को निष्पाप व कल्याणकर बनाऊँ।
Subject
सूर्य द्वारा पापमोचन [जागरित + स्वप्न]