Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Yajurveda Adhyay 20 / Mantra 15

90 Mantra
20/15
Devata- वायुर्देवता Rishi- प्रजापतिर्ऋषिः Chhand- निचृदनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
यदि॒ दिवा॒ यदि॒ नक्त॒मेना॑सि चकृ॒मा व॒यम्। वा॒युर्मा॒ तस्मा॒देन॑सो॒ विश्वा॑न्मुञ्च॒त्वꣳह॑सः॥१५॥

यदि॑। दिवा॑। यदि॑। नक्त॑म्। एना॑सि। च॒कृ॒म। व॒यम्। वा॒युः। मा॒। तस्मा॑त्। एन॑सः। विश्वा॑त्। मु॒ञ्च॒तु॒। अꣳह॑सः ॥१५ ॥

Mantra without Swara
यदि दिवा यदि नक्तमेनाँसि चकृमा वयम् । वायुर्मा तस्मादेनसो विश्वान्मुञ्चत्वँहसः ॥

यदि। दिवा। यदि। नक्तम्। एनासि। चकृम। वयम्। वायुः। मा। तस्मात्। एनसः। विश्वात्। मुञ्चतु। अꣳहसः॥१५॥

Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. (यदि) = यदि (दिवा) = दिन में और (यदि) = अथवा (नक्तम्) = रात्रि में (वयम्) = हम (एनांसि) = पापों को (चक्रम) = कर बैठते हैं तो २. (वायुः) = अन्तरिक्षस्थ देवों का मुखिया वायु (मा) = मुझे (तस्मात्) = उस (विश्वात्) = सम्पूर्ण (एनसः) = पाप से मुञ्चतु छुड़ाए और इस प्रकार उन पापों से होनेवाले (अंहसः) = कष्टों से भी (मुञ्चतु =) मुक्त करे। ३. दिन के विषय में सबसे बड़ा अपराध यह है कि दिन में हम अकर्मण्य हो जाएँ। 'अहन्' की भावना है- न हन=न नष्ट करना । 'दिन के एक-एक क्षण को मूल्यवान् समझना और उन्हें नष्ट न होने देना' यही दिन का सदुपयोग है। निरन्तर उत्तम कर्मों में लगे रहकर हम दिन के विषय में सम्भव अपराधों से बचते हैं और रात्रि में गाढ़ी निद्रा में जाकर रात्रि - सम्बन्धी पापों से भी बच जाते हैं। 'रात्रि' - रमयित्री है, आराम के लिए है। 'उसमें एक-एक बजे तक जागते रहना', रात्रि के विषय में अपराध है । ४. उस अपराध से बचेंगे तो वायु हमें उन अपराधों से होनेवाले कष्टों से मुक्त करेगा। 'वायु' शब्द 'वा गतिगन्धनयो:' धातु से बना है। दिन में गति व रात्रि में गन्धन=मल का अल्पीभाव-ये भावनाएँ वायु शब्द में निहित हैं। 'दिनभर मैं गतिशील बना रहूँ तथा रात्रि में प्रकृति को दिनभर की टूट-फूट व मल को समाप्त करने का अवसर दूँ', यही वायु की प्रेरणा है। ऐसा होने पर मैं दिन-रात के विषय में होनेवाले पापों से, कष्टों से बचा रहूँगा।
Essence
भावार्थ- हम दिन में उत्तम कर्मों में लगे रहें तथा रात्रि में गाढ़ निद्रा के आनन्द का अनुभव करने का प्रयत्न करें।
Subject
वायु द्वारा पापमोचन [दिवा+नक्तम्]