Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Yajurveda Adhyay 19 / Mantra 93

95 Mantra
19/93
Devata- अश्विनौ देवते Rishi- शङ्ख ऋषिः Chhand- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
अङ्गा॑न्या॒त्मन् भि॒षजा॒ तद॒श्विना॒त्मान॒मङ्गैः॒ सम॑धा॒त् सर॑स्वती। इन्द्र॑स्य रू॒पꣳ श॒तमा॑न॒मायु॑श्च॒न्द्रेण॒ ज्योति॑र॒मृतं॒ दधा॑नाः॥९३॥

अङ्गा॑नि। आ॒त्मन्। भि॒षजा॑। तत्। अ॒श्विना॑। आ॒त्मान॑म्। अङ्गैः॑। सम्। अ॒धा॒त्। सर॑स्वती। इन्द्र॑स्य। रू॒पम्। श॒तमा॑न॒मिति॑ श॒तऽमा॑नम्। आयुः॑। च॒न्द्रे॑ण। ज्योतिः॑। अ॒मृत॑म्। दधा॑नाः ॥९३ ॥

Mantra without Swara
अङ्गान्यात्मन्भिषजा तदश्विनात्मानमङ्गैः समधात्सरस्वती । इन्द्रस्य रूपँ शतमानमायुश्चन्द्रेण ज्योतिरमृतन्दधानाः ॥

अङ्गानि। आत्मन्। भिषजा। तत्। अश्विना। आत्मानम्। अङ्गैः। सम्। अधात्। सरस्वती। इन्द्रस्य। रूपम्। शतमानमिति शतऽमानम्। आयुः। चन्द्रेण। ज्योतिः। अमृतम्। दधानाः॥९३॥

Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. उपासक के, जितेन्द्रिय पुरुष के, (अङ्गानि) = अङ्ग (आत्मन्) = सदा आत्मा में होते हैं, अर्थात् यह सब अङ्गों से उन उन क्रियाओं को करता हुआ परमात्मा को भूलता नहीं । २. (तत् अश्विना) = प्राणापान (भिषजा) = इसके वैद्य होते हैं। प्राणापान की शक्ति की वृद्धि के कारण यह नीरोग बना रहता है। ३. (सरस्वती) = ज्ञान की अधिष्ठातृदेवता, अर्थात् ज्ञानी बनकर यह अङ्गैः योगाङ्गों के द्वारा (आत्मानम्) = उस परमात्मा को समधात् सम्यक् धारण करता है, स्वाध्याय करता है और इस स्वाध्यायरूप क्रियायोग से यह अपने को परमात्मा से जोड़ने का प्रयत्न करता है । ४. (इन्द्रस्य) = इस प्रकार इस जितेन्द्रिय पुरुष का रूपम् रूप यह होता है कि यह [क] (शतमानम् आयुः) = सौ वर्ष से मपी आयु को प्राप्त करता है। [ख] (चन्द्रेण ज्योति:) = मानस आह्लाद के साथ ज्ञान की ज्योतिवाला होता है और [ग] ये उपासक (अमृतं दधानाः) = विषयों के पीछे न मरने की वृत्ति को तथा नीरोगता व अमरता को धारण करता है।
Essence
भावार्थ - जितेन्द्रिय पुरुष अपने अङ्गों को आत्मा में स्थापित करने का प्रयत्न करता है, प्राणापान-शक्ति की वृद्धि से नीरोग होता है, ज्ञान व योगाङ्गों से प्रभु से मेल करता है, सौ वर्ष तक जीता है, प्रसन्न रहता है, ज्योतिर्मय व विषयों के पीछे न मरनेवाला होता है।
Subject
शतमानम् आयुः 'प्रसाद प्रकाश-प्रभाव'