Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Yajurveda Adhyay 19 / Mantra 78

95 Mantra
19/78
Devata- प्रजापतिर्देवता Rishi- शङ्ख ऋषिः Chhand- भुरिक् त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
वेदे॑न रू॒पे व्य॑पिबत् सुतासु॒तौ प्र॒जाप॑तिः। ऋ॒तेन॑ स॒त्यमि॑न्द्रि॒यं वि॒पान॑ꣳ शु॒क्रमन्ध॑स॒ऽइन्द्र॑स्येन्द्रि॒यमि॒दं पयो॒ऽमृतं॒ मधु॑॥७८॥

वेदे॑न। रू॒पेऽइति॑ रू॒पे। वि। अ॒पि॒ब॒त्। सु॒ता॒सु॒तौ। प्र॒जाप॑ति॒रिति॒ प्र॒जाऽप॑तिः। ऋ॒तेन॑। स॒त्यम्। इ॒न्द्रि॒यम्। वि॒पान॒मिति॑ वि॒ऽपान॑म्। शु॒क्रम्। अन्ध॑सः। इन्द्र॑स्य। इ॒न्द्रि॒यम्। इ॒दम्। पयः॑। अ॒मृत॑म्। मधु॑ ॥७८ ॥

Mantra without Swara
वेदेन रूपे व्यपिबत्सुतासुतौ प्रजापतिः । ऋतेन सत्यमिन्द्रियँविपानँ शुक्रमन्धसऽइन्द्रस्येन्द्रियमिदम्पयोमृतम्मधु ॥

वेदेन। रूपेऽइति रूपे। वि। अपिबत्। सुतासुतौ। प्रजापतिरिति प्रजाऽपतिः। ऋतेन। सत्यम्। इन्द्रियम्। विपानमिति विऽपानम्। शुक्रम्। अन्धसः। इन्द्रस्य। इन्द्रियम्। इदम्। पयः। अमृतम्। मधु॥७८॥

Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. (प्रजापतिः) = यह राजा (वेदेन) = [ईश्वरप्रकाशितेन वेदचतुष्टयेन - द०] वेद से, ईश्वर से दिये गये ज्ञान से रूपे सत्य व अनृत के रूप को (व्यपिबत्) = विशेष रूप से ग्रहण करे । २. इस बात को सम्यक् समझे कि (सुतासुतौ) = [प्रेरिताप्रेरितौ - द०] किस बात की वेद में विधि व प्रेरणा है तथा किस बात का निषेध है, विधि-निषेधात्मक वेदवाक्यों से वह धर्माधर्म को सम्यक् जाने। स्वयं धर्माधर्म को जानता हुआ ही वह प्रजा में धर्म की स्थापना तथा अधर्म का नाश कर सकता है। ३. यह ज्ञान उसे तभी होता है जब शरीर में व्याप्त किया हुआ सोम (ऋतेन) = यज्ञियवृत्ति से (सत्यम् इन्द्रियं विपानम्) = उसे सत्ययुक्त करता है, शक्तिशाली बनाता है और उसकी रोगों से रक्षा करता है । ४. (शुक्रम्) = यह सोम उसे उज्ज्वल व क्रियाशील बनाता है। ५. (अन्धसः) = अन्न से उत्पन्न हुआ यह सोम (इन्द्रस्य) = इस ज्ञान व ऐश्वर्य सम्पन्न राजा का (इन्द्रियम्) = बल बनता है । (इदम्) = यह उसे (पयः अमृतं मधु) = आप्यायित करता है, नीरोग करता है तथा मधुर बनाता है।
Essence
भावार्थ - राजा सत्यासत्य के स्वरूप को ठीक समझनेवाला हो। वह वेद के विधि - निषेधात्मक वाक्यों से धर्माधर्म का ज्ञान प्राप्त करे।
Subject
विधि-निषेध