Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Yajurveda Adhyay 19 / Mantra 53

95 Mantra
19/53
Devata- पितरो देवताः Rishi- शङ्ख ऋषिः Chhand- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
त्वया॒ हि नः॑ पि॒तरः॑ सोम॒ पूर्वे॒ कर्मा॑णि च॒क्रुः प॑वमान॒ धीराः॑। व॒न्वन्नवा॑तः परि॒धीँ१ऽरपो॑र्णु वी॒रेभि॒रश्वै॑र्म॒घवा॑ भवा नः॥५३॥

त्वया॑। हि। नः॒। पि॒तरः॑। सो॒म॒। पूर्वे॑। कर्मा॑णि। च॒क्रुः। प॒व॒मा॒न॒। धीराः॑। व॒न्वन्। अवा॑तः। प॒रि॒धीनिति॑ परि॒ऽधीन्। अप॑। ऊ॒र्णु॒। वी॒रेभिः॑। अश्वैः॑। म॒घवेति॑ म॒घऽवा॑। भ॒व॒। नः॒ ॥५३ ॥

Mantra without Swara
त्वया हि नः पितरः सोम पूर्वे कर्माणि चक्रुः पवमान धीराः । वन्वन्नवातः परिधीँरपोर्णु वीरेभिरश्वैर्मघवा भवा नः ॥

त्वया। हि। नः। पितरः। सोम। पूर्वे। कर्माणि। चक्रुः। पवमान। धीराः। वन्वन्। अवातः। परिधीनिति परिऽधीन्। अप। ऊर्णु। वीरेभिः। अश्वैः। मघवेति मघऽवा। भव। नः॥५३॥

Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. हे (सोम) = शान्तात्मन्! आचार्य ! (नः) = हमारे (पूर्वे) = हमसे पूर्व काल में होनेवाले (धीराः) = धीमान् व ध्यानवान्, धैर्यशाली (पितरः) = पितर (हि) = निश्चय से (त्वया) = तुझसे, अर्थात् आपके निर्देशों के अनुसार (कर्माणि चक्रुः) = कर्मों को करते थे। हमारे पितर अपने आचार्यों के कहने के अनुसार कर्मों को करनेवाले हुए। हमें भी उसी मार्ग को अपनाकर आचार्य-निर्देशों पर ही चलना चाहिए। २. हे (पवमान) = अपने जीवन को पूर्ण पवित्र करनेवाले आचार्य ! (वन्वन्) = वासनाओं का हिंसन करनेवाले [वन् = to injure] अथवा वासनाओं को पराजित करनेवाले [to conquer] आचार्य ! (अवातः) = स्वयं सभी उपद्रवों से अहिंसित होता हुआ तू (परिधीन्) = हमारे चारों ओर स्थित हुए हुए इन काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर आदि शत्रुओं को (अपोर्णु) = हमसे दूर आच्छादित कर। ये शत्रु हम तक पहुँचनेवाले न हों। इन शत्रुओं से बचाकर आप हमें भी अपनी भाँति 'पवमान' = पवित्र व 'वन्वन्' [win] विजेता बनाइए । ३. इन वासनाओं से बचाकर (वीरेभिः अश्वैः) = वीरता से युक्त शक्तिसम्पन्न इन्द्रियरूप अश्वों से आप (नः) = हमारे लिए (मघवा) = पापशून्य ऐश्वर्यवाले (भव) = होओ। आपकी कृपा से हम इन शक्तिशाली इन्द्रियों के द्वारा [मघमख] उत्तमोत्तम यज्ञों को सिद्ध करनेवाले हों।
Essence
भावार्थ - १. हम आचार्यों के निर्देशों के अनुसार कर्मों को करनेवाले हों । २. वासनाओं का पराजय करें ३. शक्तिसम्पन्न इन्द्रियों से यज्ञात्मक कर्मों के करनेवाले हों।
Subject
कर्मशील- विजेता