Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Yajurveda Adhyay 19 / Mantra 42

95 Mantra
19/42
Devata- सोमो देवता Rishi- वैखानस ऋषिः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
पव॑मानः॒ सोऽअ॒द्य नः॑ प॒वित्रे॑ण॒ विच॑र्षणिः। यः पोता॒ स पु॑नातु मा॥४२॥

पव॑मानः। सः। अ॒द्य। नः॒। प॒वित्रे॑ण। विच॑र्षणि॒रिति॒ विऽच॑र्षणिः। यः। पोता॑। सः। पु॒ना॒तु॒। मा॒ ॥४२ ॥

Mantra without Swara
पवमानः सोऽअद्य नः पवित्रेण विचर्षणिः । यः पोता स पुनातु मा ॥

पवमानः। सः। अद्य। नः। पवित्रेण। विचर्षणिरिति विऽचर्षणिः। यः। पोता। सः। पुनातु। मा॥४२॥

Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. (सः पवमानः) = वह शोधक सोम (अद्य) = आज (नः) = हमें (पुनातु) = पवित्र करे। हमारे शरीर के रोगों को नष्ट करके हमें स्वास्थ्य की दीप्ति देनेवाला हो। २. (विचर्षणिः) = वह VkgekjsNrr dkst kaueky ki kg Sins of omissions [अकृत] तथा Sins of commissions [कृत] को देखनेवाला परमात्मा (पवित्रेण) = पवित्र करनेवाले ज्ञान से (मा) = मुझे (पुनातु) = पवित्र करे। मुझे वह ज्ञान प्राप्त हो जिसके प्राप्त होने पर मैं पापों से मुक्त हो जाऊँ। ३. (यः पोता) = जो हमारे हृदयों को पूर्ण पवित्र कर देनेवाले प्रभु हैं (सः) = वे वासना को नष्ट करके शुद्धता को उत्पन्न करनेवाले प्रभु (मा) = मुझे (पुनातु) = पूर्ण पवित्र कर दें। प्रभु के नाम का जप व तदर्थभावन मेरे हृदय को वासनाशून्य करनेवाला हो।
Essence
भावार्थ- सोम मुझे नीरोग करके स्वास्थ्य की दीप्ति दे। सर्वव्यापक प्रभु के सामीप्य को अनुभव करके मैं पापों से बचूँ। प्रभु नाम-स्मरण मेरी ढाल बन जाए।
Subject
पवित्रता