Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Yajurveda Adhyay 19 / Mantra 29

95 Mantra
19/29
Devata- इडा देवता Rishi- हैमवर्चिर्ऋषिः Chhand- निचृदनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
इडा॑भिर्भ॒क्षाना॑प्नोति सूक्तवा॒केना॒शिषः॑। शं॒युना॑ पत्नीसंया॒जान्त्स॑मिष्टय॒जुषा॑ स॒ꣳस्थाम्॥२९॥

इडा॑भिः। भ॒क्षान्। आ॒प्नो॒ति॒। सू॒क्त॒वा॒केनेति॑ सूक्तऽवा॒केन॑। आ॒शिष॒ इत्या॒ऽशिषः॑। शं॒युनेति॑ श॒म्ऽयुना॑। प॒त्नी॒सं॒या॒जानिति॑ पत्नीऽसंया॒जान्। स॒मि॒ष्ट॒य॒जुषेति॑ समिष्टऽय॒जुषा॑। स॒ꣳस्थामिति॑ स॒म्ऽस्थाम् ॥२९ ॥

Mantra without Swara
इडाभिर्भक्षानाप्नोति सूक्तवाकेनाशिषः । शम्युना पत्नीसँयाजान्त्समिष्टयजुषा सँस्थाम् ॥

इडाभिः। भक्षान्। आप्नोति। सूक्तवाकेनेति सूक्तऽवाकेन। आशिष इत्याऽशिषः। शंयुनेति शम्ऽयुना। पत्नीसंयाजानिति पत्नीऽसंयाजान्। समिष्टयजुषेति समिष्टऽयजुषा। सꣳस्थामिति सम्ऽस्थाम्॥२९॥

Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. गतमन्त्र के अनुसार 'अवभृथ' [यज्ञान्त स्नान] करनेवाला व्यक्ति (इडाभिः) = पृथिवी से [ इडा = पृथिवी - नि० १।१] (भक्षान्) = भक्षणीय पदार्थों को प्राप्त करता है अथवा (इडाभि:) = गौओं से [इडा=acow] भोजन को प्राप्त करता है, अर्थात् इसका भोजन दूध व वानस्पतिक अन्न, शाक-फल ही होते हैं । २. इन सात्त्विक भोजनों का सेवन करते हुए सात्त्विक अन्तःकरणवाला बनकर (सूक्तवाकेन) = सदा मधुर, सत्य वाणियों के द्वारा यह (आशिषः) = इच्छाओं को प्राप्त करता है, अर्थात् अपने जीवन में सत्य को प्रतिष्ठित करके यह सब क्रियाओं को सफल कर पाता है, यह जैसा चाहता है, वैसा ही सोचता है। ३. इस प्रकार सात्त्विक भोजनों व सत्य का सेवन करनेवालों का जीवन शान्त होता है। इस (शंयुना) = शान्ति को अपने साथ जोड़ने से यह (पत्नीसंयाजान्) = पत्नी के साथ उत्तम यज्ञों का आप्नोति व्यापन करनेवाला होता है, अर्थात् यह अपने जीवन में अपने जीवन- सखा [पत्नी] से मिलकर उत्तमोत्तम यज्ञात्मक कर्मों का करनेवाला होता है। ४. (समिष्टयजुषा) = इन किये हुए उत्तम यज्ञों से [सम्= सम्यक् इष्ट- कृत यजु: - यज्ञ] (संस्थाम्) उत्तम स्थिति को ब्राह्मीस्थिति को प्राप्त करता है।
Essence
भावार्थ- हमारा भोजन अन्न, फल, शाक व दूध हों। हम सत्य से सब इष्टकार्यों सिद्ध करें। शान्ति से गृहस्थ में यज्ञों का सेवन करें। इन सम्यक् कृत यज्ञों के को द्वारा स्थितप्रज्ञता व ब्राह्मीस्थिति को प्राप्त करें।
Subject
संस्था [ब्राह्मीस्थिति]