Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Yajurveda Adhyay 18 / Mantra 8

77 Mantra
18/8
Devata- आत्मा देवता Rishi- देवा ऋषयः Chhand- स्वराट् शक्वरी Swara- धैवतः
Mantra with Swara
शं च॑ मे॒ मय॑श्च मे प्रि॒यं च॑ मेऽनुका॒मश्च॑ मे॒ काम॑श्च मे सौमन॒सश्च॑ मे॒ भग॑श्च मे॒ द्रवि॑णं च मे भ॒द्रं च॑ मे॒ श्रेय॑श्च मे॒ वसी॑यश्च मे॒ यश॑श्च मे य॒ज्ञेन॑ कल्पन्ताम्॥८॥

शम्। च॒। मे॒। मयः॑। च॒। मे॒। प्रि॒यम्। च॒। मे॒। अ॒नु॒का॒म इत्य॑नुऽका॒मः। च॒। मे॒। कामः॑। च॒। मे॒। सौ॒म॒न॒सः। च॒। मे॒। भगः॑। च॒। मे॒। द्रवि॑णम्। च॒। मे॒। भ॒द्रम्। च॒। मे॒। श्रेयः॑। च॒। मे॒। वसी॑यः। च॒। मे॒। यशः॑। च॒। मे॒। य॒ज्ञेन॑। क॒ल्प॒न्ता॒म् ॥८ ॥

Mantra without Swara
शञ्च मे मयश्च मे प्रियञ्च मे नुकामश्च मे कामश्च मे सौमनसश्च मे भगश्च मे द्रविणञ्च मे भद्रञ्च मे श्रेयश्च मे वसीयश्च मे यशश्च मे यज्ञेन कल्पन्ताम् ॥

शम्। च। मे। मयः। च। मे। प्रियम्। च। मे। अनुकाम इत्यनुऽकामः। च। मे। कामः। च। मे। सौमनसः। च। मे। भगः। च। मे। द्रविणम्। च। मे। भद्रम्। च। मे। श्रेयः। च। मे। वसीयः। च। मे। यशः। च। मे। यज्ञेन। कल्पन्ताम्॥८॥

Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. पिछले मन्त्र के अन्तिम वाक्य के अनुसार कृषि करते हुए तथा कृषि में आनेवाले प्रतिबन्धों को निवृत्त करते हुए (शं च मे) = मुझे ऐहिक सुख प्राप्त हो और साथ ही (मयः च मे) = आमुष्मिक सुख भी मैं प्राप्त कर सकूँ। कृषि से मेरा जीवन इस प्रकार पुरुषार्थ का हो कि मैं व्यसनों से ऊपर उठा रहूँ। २. (प्रियं च मे) = मुझे सब प्रीत्युत्पादक वस्तुएँ प्राप्त हों। (अनुकामः च मे) = सब धर्मानुकूल काम मुझे प्राप्त हों। ३. (कामः च मे) संसार के उचित आनन्द मुझे मिलें और (सौमनसः च मे) = मेरा मन सदा प्रसन्न रहे । ४. (भगः च मे) = मुझे सदा सौभाग्य प्राप्त हो। (द्रविणं च मे) = और कार्य सञ्चालन के लिए आवश्यक धन भी मुझे प्राप्त हो। ५. (भद्रं च मे) = मुझे कल्याण व सुख प्राप्त हो तथा (श्रेयः च मे) = मैं मोक्ष को प्राप्त करनेवाला बनूँ। ६. (वसीयः च मे) = मुझे [अतिशयेन वस्तृ] निवास के योग्य वसुमान् गृह प्राप्त हो तथा (यशः च मे) = मुझे उत्तम कर्मों से होनेवाली कीर्ति प्राप्त हो । मेरी ये सब वस्तुएँ (यज्ञेन कल्पन्ताम्) = यज्ञ से सम्पन्न हों।
Essence
भावार्थ- मुझे इस लोक व परलोक का कल्याण प्राप्त हो। मुझे आवश्यक धन की कमी न हो और मुझे प्रसन्न मन व यश का लाभ हो ।
Subject
शम्+यशः