Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Yajurveda Adhyay 18 / Mantra 31

77 Mantra
18/31
Devata- विश्वेदेवा देवताः Rishi- देवा ऋषयः Chhand- निचृदार्षी त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
विश्वे॑ऽअ॒द्य म॒रुतो॒ विश्व॑ऽऊ॒ती विश्वे॑ भवन्त्व॒ग्नयः॒ समि॑द्धाः। विश्वे॑ नो दे॒वाऽअव॒साग॑मन्तु॒ विश्व॑मस्तु॒ द्रवि॑णं॒ वाजो॑ऽअ॒स्मे॥३१॥

विश्वे॑। अ॒द्य। म॒रुतः॑। विश्वे॑। ऊ॒ती। विश्वे॑। भ॒व॒न्तु॒। अ॒ग्नयः॑। समि॑द्धा॒ इति॒ सम्ऽइ॑द्धाः। विश्वे॑। नः॒। दे॒वाः। अ॒व॒सा। आ। ग॒म॒न्तु॒। विश्व॑म्। अ॒स्तु॒। द्रवि॑णम्। वाजः॑। अ॒स्मेऽइत्य॒स्मे ॥३१ ॥

Mantra without Swara
विश्वेऽअद्य मरुतो विश्वऽऊती विश्वे भवन्त्वग्नयः समिद्धाः । विश्वे नो देवाऽअवसागमन्तु विश्वमस्तु द्रविणँवाजोऽअस्मे ॥

विश्वे। अद्य। मरुतः। विश्वे। ऊती। विश्वे। भवन्तु। अग्नयः। समिद्धा इति सम्ऽइद्धाः। विश्वे। नः। देवाः। अवसा। आ। गमन्तु। विश्वम्। अस्तु। द्रविणम्। वाजः। अस्मेऽइत्यस्मे॥३१॥

Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. पिछले मन्त्र के व्रत को पूरा करने के लिए प्रार्थना करते हैं कि (अद्य) = आज (विश्वे) = सब (मरुतः) = प्राण (अवसागमन्तु) = हमें प्राप्त हों। प्राण-साधना के द्वारा हम अपनी शक्ति व ऐश्वर्य प्राप्ति-क्षमता की साधना करें। २. (विश्वे) = सब प्राण (ऊती) = रक्षण के हेतु (आगमन्तु) = हमें प्राप्त हों। ३. हमारे जीवन में (विश्वे अग्नयः) = सब अग्नियाँ (समिद्धाः भवन्तु) = दीप्त हों। हमारे शरीर में जाठराग्नि के द्वारा शक्ति की अग्नि प्रज्वलित हो, हमारे हृदय में स्नेह की अग्नि का तथा हमारे मस्तिष्क में ज्ञानाग्नि का प्रादुर्भाव हो । ४. (विश्वे देवा:) = सब देव (अवसा) = रक्षण के हेतु से (नः) = हमें (आगमन्तु) = प्राप्त हों और ५. उन देवों की कृपा से (विश्वम्) = सब (द्रविणम्) = धन तथा (वाजः) शक्ति (अस्मे) = हमारे लिए (अस्तु) = हो ।
Essence
भावार्थ- देवों की कृपा व रक्षण से हमें शक्ति व ऐश्वर्य प्राप्त हो। इस शक्ति व ऐश्वर्य के द्वारा हम अपनी मातृभूमि की स्वतन्त्रता का साधन करें।
Subject
द्रविणं-वाजः