Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Yajurveda Adhyay 16 / Mantra 53

66 Mantra
16/53
Devata- रुद्रा देवताः Rishi- परमेष्ठी प्रजापतिर्वा देवा ऋषयः Chhand- निचृदार्ष्यनुस्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
स॒हस्रा॑णि सहस्र॒शो बा॒ह्वोस्तव॑ हे॒तयः॑। तासा॒मीशा॑नो भगवः परा॒चीना॒ मुखा॑ कृधि॥५३॥

स॒हस्रा॑णि। स॒ह॒स्र॒श इति॑ सहस्र॒ऽशः। बा॒ह्वोः। तव॑। हे॒तयः॑। तासा॑म्। ईशा॑नः। भ॒ग॒व॒ इति॑ भगवः। प॒रा॒चीना॑। मुखा॑। कृ॒धि॒ ॥५३ ॥

Mantra without Swara
सहस्राणि सहस्रशो बाह्वोस्तव हेतयः । तासामीशानो भगवः पराचीना मुखा कृधि ॥

सहस्राणि। सहस्रश इति सहस्रऽशः। बाह्वोः। तव। हेतयः। तासाम्। ईशानः। भगव इति भगवः। पराचीना। मुखा। कृधि॥५३॥

Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. हे (भगवः) = समग्र ऐश्वर्य सम्पन्न राजन् ! (तव बाह्वोः) = आपकी भुजाओं में (सहस्राणि) = हज़ारों प्रकार के (सहस्रशः) = संख्या में हज़ारों (हेतयः) = हनन - साधन शस्त्र हैं । २. (तासाम् ईशानः) = उनके पूर्ण प्रभु होते हुए, अर्थात् उनके चलाने व रोकने में पूर्ण अभ्यस्त होते हुए आप (तासाम्) = उन शस्त्रों के (मुखा) = मुखों को (पराचीना) = हमसे दूसरी ओर गया हुआ, अर्थात् हमसे विपरीत दिशा में (कृधि) = कर दीजिए। अपनी तोपों का मुख हमसे दूर दूसरी ओर कर दीजिए। आपके ये अस्त्र आपकी प्रजा को ही न भूनने लगे। ३. [क] ये अस्त्र प्रकारों के दृष्टिकोण से सहस्रों हैं, और प्रत्येक संख्या में हज़ारों में है। [ख] राजा व राजपुरुष इन अस्त्रों के प्रयोग में पूर्ण निपुण हैं। [ग] इन अस्त्रों का प्रयोग वे शत्रुओं पर ही करते हैं, अपनी प्रजा पर नहीं ।
Essence
भावार्थ - शतशः शस्त्रों के प्रयोग में निपुण राजा शत्रुओं पर ही शस्त्र प्रयोग करता है, उसके शस्त्र प्रजापीड़न का कारण नहीं बनते।
Subject
सहस्राणि सहस्त्रशः